रिम्स डाॅक्टराें की प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती से राेक लगेगी, नर्साें की भी भर्ती जल्द हाेगी

रांची । रिम्स के डाॅक्टराें की प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती से राेक लगाई जाएगी। नर्साें के खाली पद भी जल्द भरे जाएंगे। यह फैसला शुक्रवार काे झारखंड हाईकाेर्ट स्थित महाधिवक्ता (एजी) कार्यालय में हुई बैठक में लिया गया। नर्साें की नियुक्ति प्रक्रिया काे कैसे कानूनी रूप से दुरुस्त किया जाए, इस पर एजी ने सरकार काे कुछ सुझाव भी दिए। रिम्स की लचर व्यवस्था पर हाईकाेर्ट की नाराजगी के बाद महाधिवक्ता ने यह उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी।

इसमें एजी अजीत कुमार, स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी और रिम्स निदेशक डाॅ. दिनेश कुमार सिंह के अलावा कई अन्य अधिकारी माैजूद थे। करीब एक घंटे चली बैठक में एजी ने काेर्ट की मंशा से अधिकारियाें काे अवगत कराया और वहां के सुधार का प्लान मांगा। अधिकारियाें ने बताया कि वे दाे दिन में रिपाेर्ट देंगे, जिसके अाधार पर काेर्ट में शपथ पत्र दायर किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर काे हाेनी है।

डाॅक्टराें का प्राइवेट प्रैक्टिस किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

बैठक के बाद स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि रिम्स के डाॅक्टराें का प्राइवेट प्रैक्टिस किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिनके खिलाफ एेसी शिकायतें मिली हैं या मिलेंगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं एजी ने बताया कि रिम्स प्रबंधन अाॅटाेनाेमस बाॅडी है, लेकिन वहां किसी गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं ताे सरकार हस्तक्षेप करेगी। सरकार रिम्स प्रबंधन काे पैसे देती है। ऐसे में उसके सही खर्च और सुविधाअाें के लिए प्रबंधन काे निर्देशित कर सकती है। इस पर रिम्स प्रबंधन ने कहा कि सरकार ने जाे 300 कराेड़ दिए थे, वह वेतन अादि मद की थी। पद खाली रहने के कारण ये पैसे खर्च नहीं हुए। नर्साें की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। इसे तेज किया गया है।

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