मोदी सरकार के फैसलों के खिलाफ 23, 26 व 30 जनवरी को देशव्यापी अभियान चलाएगा विपक्ष

नई दिल्ली : कांग्रेस सहित 20 विपक्षी दलों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और मोदी सरकार के अन्य फैसलों के खिलाफ आगामी 23 जनवरी (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती), 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 30 जनवरी (महात्मा गांधी शहादत दिवस) पर देशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में सोमवार को संपन्न इस बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक हालात पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में देश के विभिन्न संगठनों, वर्गों और प्रमुख हस्तियों से अपील की गई है कि वे संविधान की रक्षा के लिए आगे आएं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी)  और महात्मा गांधी की शहादत दिवस( 30 जनवरी) को देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने की मुहिम चलाएं । गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर देश के सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की शपथ लें।

विपक्षी दलों ने  देशवासियों से आग्रह किया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इन आयोजनों में शामिल हों।

प्रस्ताव में नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को असंवैधानिक बताते हुए कहा गया है कि इससे दलितों, धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों को नुकसान पंहुचेगा । प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर भविष्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का आधार बनेगा। विपक्षी दलों ने सीएए को वापस लिए जाने तथा जनसंख्या रजिस्टर और नागरिकता रजिस्टर को तत्काल रोके जाने की मांग की।

विपक्षी दलों ने कहा कि जिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नागरिकता रजिस्टर का विरोध किया है उन्हें अपने यहां जनसंख्या रजिस्टर का काम भी रोक देना चाहिए ।

विपक्षी दलों ने सीएए को लेकर देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों पर दमनात्मक कार्रवाई करने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, असम और कर्नाटक में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया जिससे कई लोगों की मौत हुई।

प्रस्ताव में देश के विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पुलिस की कथित ज्यादतियों की निंदा की गई।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं की समस्याओं का समाधान करने की बजाय देश को बांटने  में लगे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की बजाय उनकी मांगों पर विचार होना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में इतनी हिम्मत नही है कि वह युवाओं का सामना कर सकें। उन्होंने मोदी को चुनौती दी कि वे बिना सुरक्षा के किसी विश्वविद्यालय में जाएं और छात्रों को बताएं कि वह देश को कहां ले जाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री को यह भी जवाब देना चाहिए कि देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल में कैसे पहुंच गई।

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