एबीवीपी ही दे सकता है देश को सकारात्मक दिशा: राज्यपाल

रांची। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल ने एबीवीपी के नयी कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुये परिषद को सामाजिक गतिविधियों को बढ़ाने वाला और देश एवं समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बतलाया। परिषद के छात्राओं के आत्मरक्षा के गुर सिखाने के कार्यक्रम ‘मिशन साहसी’ की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसे बड़े स्तर पर आयोजन कर विद्यालय की छात्राओं को प्रशिक्षण कर आत्म निर्भर बनाने की आवश्यकता है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो.नाथू गाड़ी और प्रदेश मंत्री राजीव रंजन देव पांडेय ने किया।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में पीजी उतीर्ण छात्रों के लिए झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट परीक्षा हर साल आयोजित करने, जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा राज्य सरकार नियमित कराने, विभागों में रिक्त पड़े पदों पर नयी बहाली करने, टूरिज्म सर्किट और इको टूरिज्म को सरकार द्वारा विकसित करने, पयर्टन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने की मांग की गयी है। ज्ञापन में मांग की गयी है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी संस्कृति एवं पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए वीडियो और डॉक्यूमेंट्री बनाया जाए और इसे देश-विदेश में प्रसारित किया जाये। किसानों की बदहाली को दूर करने के लिए राज्य में फार्मिंग सिस्टम को बढ़ावा दिया जाये।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पलामू में जनजातीय छात्र जुटान और 20 वां प्रदेश अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को भी एबीवीपी के प्रदेश प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे।
धर्मातरण करने वाले छात्रों को अल्पसंख्यक घोषित किया जाये
एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री विनीता कुमारी इंदवार ने बताया कि ज्ञापन में जनजातीय छात्रों की समस्या प्रमुख है। जिनके समाधान पर जोर दिया गया और राज्यपाल को अवगत कराया गया। इन समस्याओं में प्रत्येक कॉलेज में जनजातीय और क्षेत्रीय विषय की पढ़ाई हो।

पीएचडी शोधार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाये, साथ ही राजीव गांधी फेलोशिप योजना फिर से छात्रों को दी जाये। विनीता ने बताया कि प्रस्ताव में है कि जो भी जनजाति धर्म अंतरित हो गये हैं। उन्हें ग्राम सभा के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाये। उन्हें अल्पसंख्यक घोषित करें। जनजाति की पुरानी रीति रिवाज पूजा पद्धति एवं परंपराओं को मानने वालों को ही अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाये। महगांई को ध्यान में रखते हुए जनजातीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि में वृद्धि की जाये।
इस दौरान दीपेश कुमार, याज्ञवल्क्य शुक्ल, देवेंद्र लाल उरांव, स्नेहा गुप्ता, मनोज सोरेन, बपन घोष समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

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