ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट यानी पीआर इंटरनेट

इंटरनेट की बढ़त के अगर कुछ फायदे हैं, तो निश्चित रूप से कुछ नुकसान भी हैं। लेकिन एक काबिलेगौर बात यह भी है कि ऑनलाइन दुनिया में उपस्थिति आज की जरूरत बन गई है। इंटरनेट आधारित ऑनलाइन दुनिया लगातार अपने पंख फैला रही है। इसका प्रभाव इंसानों के बीच के संवाद और सूचनाओं या ज्ञान के आपसी आदान-प्रदान पर पड़ रहा है। सूचनाओं और समाचारों का प्रवाह इस दुनिया में करीब-करीब प्रकाश की गति से कुछ इस तरह हो रहा है कि 36 घंटे में ही कोई सूचना या खबर पुरानी हो जारी रही है। फिर भी ऑनलाइन दुनिया में किसी समाचार या सूचना को पुराना करार दे दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह इंटरनेट से अदृश्य हो गई है।

इंटरनेट सर्च इंजनों की मदद से कभी-भी उन्हें खोजा जा सकता है। ऑनलाइन दुनिया के प्रभाव इंटरनेट के कारण आज की तारीख में किसी भी कंपनी या व्यक्ति की पहुंच दूर-दराज के क्षेत्रों तक हो गई है। इस सुविधा की मार्फत यदि कोई व्यक्ति आपके बारे में कुछ नकारात्मक कहता है या कोई अप्रासंगिक हो चुका सच बयान करता है, तो निश्चित रूप से आपके वर्तमान और भविष्य पर फर्क पड़ सकता है। ऐसी बातें किसी भी रूप में हो सकती हैं। संभव है इसमें आपको पिछली नौकरी से निकाले जाने की बात कही गई हो, आपकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति को सार्वजनिक किया गया हो या फिर कुछ ऐसा कहा गया हो जिसे आपने खुद तक सीमित रखा था।

यहां तक कि आपके या किसी ब्रांड के बारे में की गई कोई नकारात्मक टिप्पणी भी वेब दुनिया में मौजूद रहकर लंबे समय तक प्रभावित करती है। चूंकि ऑनलाइन दुनिया में मौजूद हर एक शब्द बिना किसी खास प्रयास के सभी की पहुंच में रहता है। इस कारण वह शब्द और उनसे पहुंचने वाला संदेश प्राप्तकर्ताओं के बीच संबंधित (जिसके बार में संदेश हो) ब्रांड, उत्पाद, संगठन और व्यक्ति की त्वरित ढंग से एक छवि निर्मित करता है। कई कंपनियों के मालिकों ने अपने कर्मचारियों के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को निर्देशित करने वाली नीतियां भी तय कर दी हैं। कर्मचारियों को कैसे खुद को ऑनलाइन दुनिया में प्रस्तुत करना है, यह बात इन नीतियों में प्रमुख रूप से दर्शायी जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 27 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे नियोक्ताओं के लिए काम करते हैं, जिन्होंने इंटरनेट के उपयोग को लेकर नीति बना रखी होती है।

कर्मचारी ब्लॉग या वेबसाइट पर क्या लिख सकते हैं और अपने बारे में किन-किन जानकारियों को दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं आदि बातें भी इंटरनेट के इस्तेमाल से जुड़ी नीतियों में उनके नियोक्ताओं ने शामिल कर दी हैं। क्या है रेपुटेशन मैनेजमेंट यह एक ऐसा विषय क्षेत्र है, जिसमें किसी व्यक्ति या संस्थान (कॉर्पोरेट या नॉन-कॉर्पोरेट) की साख (प्रतिष्ठा) को प्रभावित करने वाले कारकों को समझने का प्रयास किया जाता है। यह विषय काफी कुछ पब्लिक रिलेशन्स से मिलता-जुलता है, लेकिन इंटरनेट, सोशल मीडिया और कंप्यूटरों के बढ़ते उपयोग ने इसे अलग विषय-क्षेत्र के रूप में स्थापित कर दिया है। इस विषय के पेशेवर अपने क्लाइंट की प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर डालने वाले तत्वों के प्रभाव को समाप्त करने के उपाय करते हैं।

ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एक प्रक्रिया है, जिसमें सर्च इंजनों की मदद से आपके ब्रांड (कंपनी का हो या व्यक्तिगत) के बारे में इंटरनेट पर हो रही तरह-तरह की चर्चाओं की निगरानी की जाती है और उन्हें आंकड़ों के रूप में इकट्ठा किया जाता है। चर्चा नकारात्मक होने की दशा में ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट के पेशेवर अपने क्लाइंट या उसके ब्रांड के पक्ष में कंटेंट तैयार करते हैं और उसे इंटरनेट माध्यमों पर प्रसारित करके सकारात्मक प्रतिक्रिया हासिल करने की व्यवस्था करते हैं। उनका सिद्धांत होता है कि नकारात्मक बातों के विरुद्ध ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक बातों को इतना प्रचारित किया जाए कि नकारात्मकता अपने आप ही खत्म हो जाए। इस कार्य को ऑनलाइन दुनिया की पब्लिक रिलेशन्स सेवा भी कहा जा सकता है।

योग्यता

रेपुटेशन मैनेजमेंट विषय में फिलहाल कोई स्पेशलाइज्ड पाठयक्रम उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस क्षेत्र में बतौर पेशेवर कदम बढ़ाने के लिए मैनेजमेंट विषय में मास्टर डिग्री का होना पहली जरूरत है। इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेशन या पब्लिक रिलेशन्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा भी होना चाहिए। देश में प्रमुख रेपुटेशन मैनेजमेंट कंपनी ई-इंटेलिजेंस एसईओ वैली सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड परफोर्मेट्रिस एसईओ सर्विसेज एजेंसी बिट्स्कैप एसईओ इंडिया ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजर का काम ऑनलाइन रेपुटेशन बढ़ाने के लिए नई रणनीतियां बनाना। दुनियाभर में अपनाए जा रहे रेपुटेशन मैनेजमेंट के बेहतरीन तरीकों को अपनाना। विरोधियों द्वारा कराई गई नकारात्मक टिप्पणियों को प्रभावहीन करने के लिए उपाय करना। क्लाइंट के व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वियों और उनकी रणनीतियों पर नजर रखना। जरूरी गुण किसी को ध्यान से सुनने का धैर्य अपने आइडिया को अच्छे से प्रस्तुत करने का हुनर लेखने की क्षमता और अच्छा संवाद कौशल स्टेटिस्टिक्स की बेहतर समझ दबाव में भी शांतिपूर्वक काम करने का गुण चुनौतियों से जूझने का जज्बा।

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