पोषक तत्वों से भरपूर मशरूम : जनजातीय समाज का प्रमुख व्यंजन

रांची : झारखंड के जनजातीय इलाकों की पहचान जंगल में मिलने वाले फल-फूल एवं कंद-मूल से भी है। राज्य के जंगलों में और खेत के ऊपरी भूमि अर्थात टांड़ भूमि पर जुलाई ,अगस्त और सितंबर माह में बहुतायत से मशरूम स्वतः उग आते हैं, जो पोषक तत्त्वों से भरपूर रहने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मददगार होते हैं। मशरूम का सेवन प्रायः हर जनजातीय समूह बड़े चाव से करता है। मशरूम में भारी मात्रा में फाइबर, पोटेशियम , विटामिन सी और अन्य पोषक तत्व पाये जाते हैं , जो इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। साथ ही इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन डी, कैल्शियम और फास्फोरस भी होता है जिसका सेवन करने से हड्डियां भी मजबूत होती हैं। मशरूम में एंटी-ऑक्सीडेंट भूरपूर माता में होता है। इनमें से खास है एर्गोथायोनिन, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने और वजन घटाने में सहायक होता है। कैंसर से बचाने में भी मशरूम सहायक है।  कोरोना काल में मशरूम की रोग प्रतिरोधक क्षमता समेत अन्य खूबियों के कारण खूंटी के बाजारों में आजकल इसकी ज़बरदस्त डिमांड देखी जा रही है जो विक्रेताओं के लिए अच्छी आमदनी का ज़रिया बन गया है त्यौहारी मौसम में तो इसकी कीमत 1000 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच जाती है। मशरूम या खुखड़ी के सीजन में जनजातीय घरों में प्रायः हर दिन मशरूम की सब्जियां बनती हैं। मशरूम में मिलने वाले विटामिन के कारण अब झारखण्ड में रहने वाले गैर जनजातीय समूह भी प्राकृतिक मशरूम का सेवन करने लगे हैं। एहतियात और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस महामारी के दौर में इंसानों के लिए दो ज़रूरी हथियार हैं प्राकृतिक इम्यून बूस्टर मशरूम कोरोना काल में स्वास्थ्य चिंताओं को दूए करने में सहायक सिद्ध हो सकता है । 

This post has already been read 827 times!

Sharing this

Related posts