National : सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से मांगा जवाब, 14 को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली। यूजीसी के दिशा-निर्देश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को दिल्ली सरकार और महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें राज्य में परीक्षा न कराने की बात कही गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान यूजीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार को फाइनल ईयर की परीक्षा निरस्त करने का अधिकार नहीं है। ये अधिकार केवल यूजीसी को है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकारें अपने से फैसला करने लगेंगी तो छात्रों की डिग्रियों को यूजीसी मान्यता नहीं देगी। उन्होंने दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की जिसके बाद कोर्ट ने 14 अगस्त को सुनवाई करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह 14 अगस्त को राज्यवार मामले की सुनवाई कर सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार ने राज्य में कोई परीक्षा आयोजित नहीं करने का फैसला किया है। पिछली 31 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र में महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की तरफ से लिए गए फैसले की कॉपी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। इस मामले पर 10 अगस्त को सुनवाई होगी। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि यूजीसी के 6 जुलाई के दिशा-निर्देश के बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार ने 13 जुलाई को बैठक की थी। उस बैठक में राज्य में कोई परीक्षा आयोजित नहीं करने का फैसला किया गया।
सुनवाई के दौरान पिछली 31 जुलाई को वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि अप्रैल में जारी दिशा-निर्देश को यूजीसी ने जुलाई में बदल दिया। तब कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसका अधिकार है। वो ऐसा कर सकते हैं। सिंघवी ने कहा था कि जुलाई के दिशा-निर्देश और ज़्यादा सख्त हैं। तब सिंघवी ने कहा कि बहुत से युनिवर्सिटीज में ऑनलाइन परीक्षा के लिए ज़रूरी सुविधाएं नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑफलाइन का भी विकल्प है। सिंघवी ने कहा था कि बहुत से लोग स्थानीय हालात या बीमारी के चलते ऑफलाइन परीक्षा नहीं दे पाएंगे। बाद में परीक्षा देने का विकल्प देने से और भ्रम होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लेकिन इसमें तो छात्रों का हित ही नज़र आता है।
यूजीसी ने 30 सितम्बर तक फाइनल ईयर की परीक्षा आयोजित करने के अपने सर्कुलर का बचाव करते हुए कहा था कि कोरोना संकट की वजह से पर्याप्त समय दिया गया है। यूजीसी के नोटिफिकेशन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर दाखिल हलफनामे में कहा है कि युनिवर्सिटीज को परीक्षा लेने के लिए पर्याप्त छूट दी गई है। वे चाहें तो आनलाइन मोड में परीक्षा ले सकती हैं या आफलाइन मोड में या दोनों में। यूजीसी ने कहा है कि अगर कोई छात्र परीक्षा में हिस्सा नहीं ले पाता है तो उसे बाद में विशेष परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। यूजीसी ने कहा है कि महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार का बिना परीक्षा के फाईनल ईयर के छात्रों को डिग्री देने का फैसला यूजीसी के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। इससे देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
याचिका दायर करने वाले छात्रों में एक छात्र कोरोना पॉजिटिव है। याचिका में कहा गया है की उसकी तरह देशभर में कई ऐसे छात्र है जो या तो खुद कोरोना पॉजिटिव हैं, क्या उनके परिवार के सदस्यों को कोरोना का संक्रमण हुआ है। ऐसे छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के लिए बाध्य करना संविधान की धारा 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन है। 
याचिकाकर्ता छात्रों की ओर से वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने याचिका में कहा है कि आमतौर पर मार्कशीट और डिग्रिया 31 जुलाई तक मिल जाती हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति है परीक्षाएं 30 सितम्बर तक खत्म की जाएंगी। इससे कई छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने या नौकरियों के अधिकार से वंचित होना होगा। ऐसा करना संविधान की धारा 14 का उल्लंघन होगा। याचिका में मांग की गई है कि फाइनल ईयर के छात्रों को भी सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर ही फैसला करना चाहिए जिसने दसवीं और 12वीं  के रिजल्ट पूर्व के प्रदर्शन और इंटरनल असेसमेंट के आधार पर जारी कर दिया। 

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