Jamshedpur : शोषित पीड़ित और दलित आदिवासी महिलाओं का उत्थान पहली प्राथमिकता : मुनमुन चक्रवर्ती

पिछले 20 वर्षों से समाज सेवा कर रही है मुनमुन चक्रवर्ती

जमशेदपुर। मुनमुन चक्रवर्ती पिछले 20 वर्षों से समाज में दलित, पीड़ित, शोषित और गरीब आदिवासी सहित हर तबके की महिलाओं के उत्थान के लिए संघर्ष कर रही है। उनका यही प्रयास रहता है कि यही प्रयास रहता है कि कि चाहे कोई भी महिला हो हो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। इसके लिए उनका हमेशा ही प्रयास रहता है, अपना और अपने परिवार का भरण पोषण सही तरीके से कर सकें। महिलाओं के उत्थान के साथ-साथ समाज सेविका मुनमुन चक्रवर्ती स्थानीय समस्याओं को लेकर भी हमेशा आवाज उठाते रहती है और उसका निदान करने के लिए हर संभव प्रयास करती है। चाहे क्षेत्र की जर्जर नाली, सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य शिक्षा की समस्या हो या फिर किसी को न्याय दिलाने की बात हो। हर समय उनका यही प्रयास रहता है कि वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके। इसके लिए हो आर्थिक रूप से भी किसी असहाय को मदद करने के लिए तैयार ही नहीं रहती बल्कि मदद करती भी है।

मुनमुन चक्रवर्ती का जीवन परिचय

समाज सेविका में प्रख्यात हो रही मुनमुन चक्रवर्ती मामून का जन्म 30 सितंबर 1982 में हुआ था उनके पिता एसके भट्टाचार्य टीनप्लेट कंपनी में पदाधिकारी थे जबकि मां अपना अल्पना भट्टाचार्य गृहणी रही हैं। इकलौता भाई राजू भट्टाचार्य कोलकाता में सैफ इंजीनियर है। मुनमुन चक्रवर्ती की प्रारंभिक शिक्षा न्यू बारीडीह स्थित जेपीएस स्कूल में हुई इसके बाद उन्होंने सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से प्लस टू की पढ़ाई की। इसके बाद मुनमुन चक्रवर्ती मामून ने मणिपाल यूनिवर्सिटी से वेब डिजाइनर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी ग्रुप से बीबीए की। मामून ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 4 साल तक क्लासिकल संगीत की शिक्षा ग्रहण की। वह अपनी मातृभाषा बेंगोली के साथ साथ हिंदी और अंग्रेजी भी बहुत ही सही तरीके से समाज और बोल लेती है। मुनमुन चक्रवर्ती 23 जनवरी 2003 में परसुडीह प्रभात नगर निवासी सौमित्र चक्रवर्ती के साथ वैवाहिक जीवन में बंध गई। उनका पति सौमित्र चक्रवर्ती सरकारी स्कूल में शिक्षक है। मुनमुन का 16 साल का बेटा शुभंकर चक्रवर्ती टेल्को गुलमोहर हाई स्कूल में दसवीं क्लास में पढ़ता है।

समाज सेवा का सफर और उपलब्धियां

मुनमुन चक्रवर्ती ने बताया कि जब वह कॉन्वेंट सेक्रेड हार्ट में प्लस टू की शिक्षा ग्रहण कर रही थी तब वह अपने गुरु तुल्य शिक्षक डॉक्टर किशोर ओझा के साथ बारहद्वारी स्थित मदर टेरेसा ज्योति क्लब गई। ज्योति क्लब में वैसे बेसहारा और बेबस महिलाओं से मिले जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं था उनसे मिलकर बहुत प्रभावित हुई। इसके साथ हैं डॉक्टर किशोर ओझा के साथ मुनमुन चक्रवर्ती अपनी टीम की छात्राओं के साथ पास में ही एक पाल ना घर में गए जहां अनाथ बच्चों का संस्था द्वारा पालन पोषण किया जा रहा था वह वहां जाकर तब बहुत भावुक हो गई जब एक मासूम सा बच्चा उनका स्कूल ड्रेस पकड़कर छोड़ ही नहीं रहा था। उसी समय मुनमुन चक्रवर्ती ने ऐसे बेसहारा बच्चों और महिलाओं की सेवा करने की ठान ली। टीनप्लेट कंपनी से जो घर में इलाज के लिए दवाइयां बच जाती थी उसको इकट्ठा करना शुरू किया और पुराने कपड़ों को साफ कर, बिस्कुट, पानी बोतल व अन्य खाने-पीने के सामानों को लेकर ज्योति क्लब की असहाय महिलाओं के बीच समय-समय पर जाकर वितरण शुरू कर दिया। 5 साल पहले मुनमुन चक्रवर्ती ऑल इंडिया वूमेंस कारपोरेशन से जुड़ी और करना स्थित कार्यालय में जाकर सदस्यता ली। महिलाओं के इस संस्था के माध्यम से स्लम बस्तियों और स्कूलों में जाकर सेवा करना शुरू कर की। इसी क्रम में वह इंटरनेशनल हुमन राइट्स से भी जुड़ी।

संस्कृति सोशल वेलफेयर ट्रस्ट का गठन

मुनमुन चक्रवर्ती ने अगस्त 2019 में संस्कृति सोशल वेलफेयर ट्रस्ट का गठन किया, जिसमें पदाधिकारी कार्यकारिणी सहित पंचानवे सक्रिय सदस्य हैं। इस बैनर तले मुनमुन चक्रवर्ती ने प्लास्टिक के दुष्परिणाम को देखते हुए डेढ़ माह तक शहर के विभिन्न इलाकों में जागरण जागरूकता अभियान चलाया। कोरोना काल में स्लम बस्तियों में जाकर ट्रस्ट के माध्यम से गर्भवती हुआ प्रसूता महिलाओं के बीच पौष्टिक आहार जिसमें हॉर्लिक्स दूध आदि का वितरण किया। साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए होम्योपैथ की दवा के साथ-साथ मास्क और खाद्य पदार्थ भी वितरण किया। गरीब बच्चों में प्रोटीन वितरण किया ताकि उनका स्वास्थ्य सही रह सके।

तालाब के किनारे चेंजिंग रूम का निर्माण

मुनमुन चक्रवर्ती ने हरहरगुट्टू, घाघीडीह और ना गाड़ी के चार तालाब किनारे स्नान करने वाले महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम का निर्माण किया जिसमें एक चेंजिंग रूम में साढ़े ₹5000 खर्च वह अपने स्तर से की। इस चेंजिंग रूम के बन जाने से तालाब में नहाने वाले महिलाओं को कपड़ा बदलने में बहुत ही सहूलियत हो रही है जिसके चर्चा ग्रामीण इलाकों में महिलाएं कर रही हैं।

संस्कृति स्पोर्ट्स एकेडमी का गठन

समाज सेविका मुनमुन चक्रवर्ती ने पिछले 9 अगस्त 2020 को आदिवासी दिवस के अवसर पर 18 वर्ष से कम उम्र के गरीब आदिवासी युवकों के लिए संस्कृति स्पोर्ट्स एकेडमी का गठन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता पोटका विधायक संजीव सरदार और टाटा स्टील स्पोर्ट्स विभाग के फुटबॉल कोच जगदीश सरदार उपस्थित थे। इस एकेडमी के तहत 15 गरीब आदिवासी बच्चे फुटबॉल खेलना सीख रहे हैं इसमें सारा खर्च कर जिम्मा मुनमुन चक्रवर्ती ने उठा रखा है।

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