Health : माडर्न जीवन शैली से हो रहे हैं नए रोग

डॉ जितेन्द्र सिन्हा
जसलोक अस्पताल
(बजरा) रांची

माडर्न जीवन शैली ने ऐसे कई नये रोगों को जन्म दिया है जिससे पुराने पीढ़ी के चिकित्सको को पाला नही पड़ता था।उन्ही में से एक है एड़ी का दर्द जो सुबह उठते ही विशेष तौर पर महिलाओ को अधिक परेशान करता है। दर्द की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि  जमीन पर पैर रखते ही चीख निकल जाती है।घरो मे चमकिले टाइल्स ,विट्रीफाइड टाइल्स,मोजाइक पर खाली पैर चलने से एड़ियो और पॅजो पर बहुत ज्यादा प्रेशर  बनता है।जिससे ऐड़ियो मे दर्द उतपन्न होता है।पहले  घरो के फर्श मिट्टी के होते थे।गोबर और मिट्टी की लिपाई होती थी जो पैरो के लिए कुशन का काम करती थी तो यह समस्या नही होती थी

चमकदार विट्रीफाइड  फर्श पर लम्बे समय तक खड़े रहने या चलने से शरीर का वजन एड़ी के माध्यम से जमीन में स्थानांतरित हो जाता है।  एड़ी को कवर करने वाली माॅसपेशिया ,लिगामेंट्रस व टेंडन्स में सूजन  और मुलायमपन आ जाता है।जिससे हड्डियां काँटे की तरह चुभने लगती है। आधुनिक  जूते एवं चप्पल हल्के और टिकाउ जरुर होते है किन्तु ये ऐड़ी दर्द का बड़कारण बन जाते है।इन्हे  टिकाऊ तथा हल्का बनाने के लिए पॉलीयूरेथीन  के तलले  से बनाया जाते है । ऐसे जूते और चप्पल पत्थर की तरह सख्त होते है और पंजों तथा एड़ीयो मे भारी दर्द पैदा करते  है

ऐड़ियो के दर्द का निवारण हड्डी रोग विशेषज्ञ करते है।ये  दर्द निवारक और सूजन उतारने वाली गोलियाँ देते है।कई बार  एड़ियो मे  स्टेरायड मिश्रितइंजेक्शन भी लगाने होते है।यूरिक ऐसिड की जाॅच  कर देखा जाता है ।कही ज्यादा तो नही।यदि मरीज  बीपी की दवा एमलोडिपिन भी पैर के तलवे मे दर्द और सूजन पैदा करता है। तुंरत बन्द कर उसी ग्रुप का   सिनेलडिपिन देना चाहिए।इसके अलावा जूते के अन्दर  हील कप, स्कूप्ड हील पैड्स, साफ्ट कुशंड स्पंजी सोल  लगवाए जाने चाहिए।पतले हवाई चप्पल हटाकर स्पंजी और मोटे गददेदार चप्पल पहनने कहा जाता है। खाली पैर न रहने की सलाह दी जाती है। बुजुर्ग महिला और पुरुष को स्पोर्ट्स शूज पहनने  की सलाह  दी जाती है।

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