चैतन्य देवियों की जीवंत झांकियां जिंदगी की तपस्या का प्रतीक : राज्यपाल

दुमका। प्रजापति ब्रह्मा ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से गांधी मैदान में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित चैतत्न्य देवियों की झांकी अध्यात्म दर्शन मेला सोमवार को शुभारंभ हुआ। मेला का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने नवरात्रि की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के महत्व को सही मायने में ब्रह्म ईश्वरीय विश्वविद्यालय के लोग समझते हैं। उन्होंने नवरात्रि के मायने बताते हुए कहा कि दुर्गा पूजा के इस अवसर पर नवरात्रि कहना समझ से परे है। ऐसे दिन को नवदिन क्यों न हम कहें।

नवदिन का शाब्दिक अर्थ नए दिन का उदय से बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवरात्रि अज्ञानता और नवदिन नए दिन का उदय से है। अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी दिन का प्रारंभ होना है। उन्होंने जीवन के उद्देश्यों को बताते हुए कहा कि जीवन प्राप्त होने के उद्देश्यों से मानव जाति भटक गया है। अंधकार से ज्ञान की तरफ ही जाना सही मायने में जिंदगी जीने का तरीका बताता है। चैतन्य देवियों के झांकियां के मायने बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह संस्थान आर्ट ऑफ लिविंग सिखाती है। जीने की कला सिखाती है। उन्होंने संस्थान के मुख्यालय माउंट अबु का जिक्र करते हुए कहा कि 144 देश में इसकी शाखा है और 9 लाख से अधिक लोग इससे जुड़े है। संस्थान की बहनें सिर्फ झांकी प्रस्तुत नहीं करती है। दिन रात अपनी तपस्या से जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

राज्यपाल ने गृहस्थ जीवन के मतलब बताते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन सही में योग है। उन्होंने जिंदगी में कुछ गलत चीजें से परहेज करने की अपील करते हुए कहा जिंदगी से काम, लालच, दुश्मनी जैसे चीजें को मिटा सकते हैं।

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