पबजी गेम खेलने से बर्बाद हो रही जिंदगियां

-योगेश कुमार सोनी-

विगत दिनों एक बच्चा जोर से चिल्लाया और मर गया। अचानक हुई इस घटना से लोग बेहद हैरान हुए लेकिन जब हकीकत का पता चला तो सबके होश उड़ गए। लड़का पबजी गेम को खेलने की वजह से मरा था। पबजी गेम ने उसकी सारी दिमागी शक्ति छीन ली थी। ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। तमाम जगह यह गेम बैन भी हो चुका है। बावजूद इसके, इससे हो रही घटनाएं कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही हैं। इससे हमारी नई पीढ़ी पर एक बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, कुछ दिनों पहले एक विडियो गेम पबजी (प्लेयर्स अननोन्स बैटल ग्राउंड) मार्किट में आया जिसको हमारे देश में बहुत पसंद किया जा रहा है। इससे पहले जो भी गेम्स आते थे, उसे केवल बच्चे ही पसंद किया करते थे। लेकिन यह गेम ऐसा है जिसकी हर आयु वर्ग के लोगों में रुचि लगातार बढ़ रही है। इस गेम में कई लोग एक साथ खेल सकते हैं। इसमें लूटपाट भी एक प्रक्रिया है। युवाओं व उम्रदराज लोगों का तो यह समय बेकार कर रहा है लेकिन बच्चों को अपराधी बना रहा है। इससे स्कूली बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर कुप्रभाव पड़ रहा है। जब से स्कूल का कोर्स या होमवर्क संबंधित साइटों पर आया है तब से बच्चे माता-पिता से मोबाइल इस बहाने से ले जाते हैं। माता-पिता इस घटना से अनजान रहते हैं कि बच्चे उसकी आड़ में पबजी गेम खेल रहे हैं। पबजी ने बच्चों की बुद्धि अपने वश में कर ली है। जानकारों के अनुसार पबजी लोगों के मस्तिष्क पर एक प्रकार के नशे की तरह हावी हो जाता है। इसकी लत छुड़ाना आसान नहीं है। स्कूली बच्चे अब पार्कों, रेस्तराओं व अन्य कई स्थानों पर यह खेल खेलते दिखाई देने लगे हैं। पबजी खेलने वाले बच्चों की पढ़ाई में पर्सेंटेज कम आने लगी तो माता-पिता की चिंता बढ़ी। जब भी बच्चों को इससे खेलने से रोका जाता है तो वे हिंसक हो जाते हैं। वे अपना व परिवार का भला-बुरा सोचने में भी अक्षम हो जाते हैं। यह गेम सिर्फ स्कूली बच्चों को ही गिरफ्त में नहीं लेता। इससे युवा वर्ग भी कम पीड़ित नहीं है। ग्रेटर नोएडा में एक कंपनी में काम कर रहे कुछ युवाओं ने तो इस गेम के चक्कर में अपनी नौकरी तक छोड़ दी। दरअसल, मामला यह था कि एक बड़ी कंपनी ने हरेक कर्मचारी को लंच के अलावा भी एक ब्रेक देने की व्यवस्था दे रखी थी। इसके तहत हरेक कर्मचारी की टाइमिंग तय थी। पता चला कि वो सभी युवा एक साथ जाते थे। लंच के अलावा वाले ब्रेक में एक साथ निकल कर पबजी खेलने लगे। जब मैनेजर ने आपत्ति जताई तो उन लोगों ने अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी। ऐसी घटनाएं अन्य आयुवर्ग के लोगों में देखने को मिल रही हैं। इसकी चपेट में आनेवाले सुबह से लेकर रात मोबाइल में लगे रहते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह गेम एक समूह का समावेश है। इसे खेलते हुए एक-दूसरे की आवाज भी सुन सकते हैं जिससे यह हर आयु वर्ग को अच्छा लगने लगा। कुछ समय पहले एक जानलेवा ब्लू व्हेल गेम आया था। उससे कई जानें चली गई थीं। बाद में कोर्ट के दखल से उस पर रोक लगाई गई। विशेषज्ञों ने पबजी को ब्लू व्हेल ज्यादा घातक बताया है। पिछले हफ्ते गुजरात सरकार ने इस पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा दिया। गुजरात के शिक्षा विभाग ने अध्यापकों को निर्देश जारी किया कि बच्चों को पबजी या अन्य गेमों से होने वाले नुकसान से अवगत कराते हुए उनके दुष्परिणाम बताएं। जरूरत है कि जब इस तरह के गेम भारत में लांच होते हैं तो इन पर नजर रखी जानी चाहिए। देखा गया कि पबजी के विज्ञापन भी लगातार अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम हो रहे हैं। नेट पर कुछ भी खोजने से पहले इसके विज्ञापन आते हैं। जितनी जल्दी इसका प्रचार-प्रसार हुआ है उतना तो किसी क्रिकेटर या फिल्मी सितारे का भी नहीं हुआ। बहरहाल, युवाओं व अन्य आयु वर्ग को स्वयं समझने व संभलने की जरूरत है। वरना जिंदगी में अंधकार के सिवाय कुछ नहीं बचेगा। सरकार को भी पबजी गेम पर तत्काल रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।

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