Health : आइये जानते हैं हृदय रोग और उससे बचाव के बारे में…

डॉ जितेन्द्र सिन्हा
जसलोक अस्पताल
(बजरा) रांची

आमतौर पर हृदय रोग को एक लाइलाज और अमीरो की बिमारी समझा जाता है। यह सच है कि इसके विशेषज्ञ डाकटर (कारडियोलॅजिसट ) का परामर्श शुल्क अन्य चिकित्सकों के बजाय बहुत अधिक होता है और ये छोटे शहरो और कसबो मे उपलबध भी नही होते फिर कस्बे और छोटे शहर के लोग हृदय रोग की ईलाज कहाॅ कराए? आइए समझते है।

दिल की बीमारी का श्रीगणेश हाई बीपी या उच्च रक्तचाप से होता है यदि बीपी की दवा नही लेते हो या आपको मालूम ही नही हो कि बीपी है तो मान ले कि आपने दिल की बिमारी को निमंत्रण पत्र भेज दिया है। यदि आप डायबिटिज नियंत्रित नही कर पाते तो समझे कि गाजे बाजे के साथ हृदय रोग का स्वागत के लिए तैयारी कर ली है। थुलथुले व मोटे और टेंशन मे रहने वालो से हृदय रोग की दोस्ती कृष्ण सुदामा जैसी हो जाती है।

हृदय रोग का अंतिम परिणाम हर्ट अटैक होता है किन्तु उसके पहले कई वर्ष तक सीने में दर्द, बेचैनी, जी मचलना, साॅस फूलना जैसे लक्षण दिखते है जो खुद ब खुद कुछेक मिनटों मे ठीक हो जाता है।यदि बांह में तेज दर्द,अधिक मात्रा में पसीना और सांस लेने में तकलीफ आने लगे तो समझे पानी सर के पास पहुंच गया है। हृदय रोग का ईलाज बहुत ही सरल है बशर्ते इसके जानकार फिजिशियन के पास पहुंचा जाए।मुश्किल है इसके लक्षण ।जो कनफूयजन पैदा करने वाले होते है और समान्य डाकटर को गैस ,उलटी और बाॅहो मे दर्द लगता है। इसलिए फिजिशयन का हृदय रोग का जानकार होना बहुत जरुरी है और इसीजी और इको कारडियोग्राफी जैसे मशीन से कनफरम करना जरुरी होता है।यह समझ ले कि हृदय रोग की दवा सीमित और अन्य बिमारियों से सस्ती होती है और जीवन भर सेवन करना आवश्यक होता है। आप हृदय रोग के इलाज मे एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी शब्दो का नाम सुनते होगे।यह सबसे आखिरी चरण की बिमारी। केवल उन लोगो पर लागू होता है जो बीपी, कोलोसट्रोल, शुगर और टेंशन की दवाइयां नही लेते या फिजिशीयन से प्रारम्भिक इलाज लेने से कतराते है।

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