भारतीय नौसेना ने जहाजों तथा पनडुब्बियों की घातक क्षमताओं को परखा

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का वार्षिक रीफिट सम्मेलन (एआरसी) तथा वार्षिक अवसंरचना सम्मेलन (एआईसी) पूर्वी नौसेना कमान विशाखापत्तनम मुख्यालय में शुरू हुआ। वार्षिक अवसंरचना सम्मेलन में बुधवार को आधुनिकीकरण तथा मरम्मत मजबूती और रीफिटिंग अवसंरचना में प्रगति की समीक्षा की गई ताकि भारतीय नौसेना के हथियारों की घातक क्षमता बनाई रखी जा सके। सम्मेलन में भारतीय नौसेना के सभी जहाजों और पनडुब्बियों को फिर से दुरुस्त करने और भारतीय नौसेना की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अवसंरचना को मजबूत बनाने की योजना तैयार की गई।

सम्मेलन की शुरुआत में ईएनसी के कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल अतुल कुमार जैन ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और नौसेना प्लेटफॉर्मों की युद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में किए जा रहे समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने समुद्र में प्लेटफॉर्मों के सतत संचालन की दिशा में नौसेना रिपेयर यार्ड की भूमिका की सराहना की। चीफ ऑफ मेटेरियल (सीओएम) ने अपने संबोधन में जहाजों तथा पनडुब्बियों को फिर से दुरुस्त करने की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की भावना के साथ अधिक से अधिक स्वदेशीकरण पर फोकस करने का आग्रह किया।
दो दिन के सम्मेलन की अध्यक्षता वाइस एडमिरल जी.एस. पब्बी, एवीएसएम, वीएसएम चीफ ऑफ मेटेरियल (सीओएम) एकीकृत मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय (नौसेना) ने की। सम्मेलन में नौसेना मुख्यालय, नौसेना के तीनों कमान, तीनों सेनाओं की अंडमान तथा निकोबार कमान, पोर्ट ब्लेयर, डॉकयार्ड, मरम्मत यार्ड तथा नौसेना के मेटेरियल संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

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