Health : बढ़ती उम्र में बीमारी से बचना है तो करें ये उपाय…

वृद्धावस्था जनित बिमारी से पाएं छुटकारा

आइये जानतें हैं बुढ़ापे में होने वाले बिमारियों के बारे में :-

खुशहाल बुढापा का एक ही मन्त्र है। भोजन से ज्यादा जांच और दवाओ मे खर्च। 60 वर्ष के बाद शरीर स्वादिष्ट और चटोरे भोजन स्वीकार नहीं कर पाता। इनपर खर्च करने का कोई फायदा भी नहीं होता है। किन्तु बीमारियां पहले से आमंत्रित होती है। निरन्तर जांच हमे जागरुक कर परेशानी से बचा लेता है।

1)  खून मे चर्बी बढना वृद्धावस्था की पहचान है। इसके कारण हर्ट मे ब्लाकेज और किडनी के जाम होने की समस्या आती है।

2) हड्डियों के जोड़, कुल्हा, घुटना और एड़ी में असहनीय दर्द को गठिया कहते है। ऐसा अधिक प्रोटिन या यूरिक एसिड बढने से होता है। आर्थराइटिस घुटनो के दो हडडी के बीच कुशन या गददा घीस जाना भी बुढापा के कारण होता है। 

3) उम्र बढने से रक्त में इन्सुलिन का उत्पादन घट जाता है। जिससे डायबिटीज हो जाता है। डायबीटीस अपने साथ पैनक्रियाज रोग लेकर आता है जिसमे भोजन कम पचता है। गैस से पेट फूला रहता है।

4 ) 60 वर्ष के बाद खून की नलियाॅ टाइट नही रह पाती, ढीली पड़ जाती है। इससे  ब्लड प्रेशर बढ जाता है। यदि बीपी का दवा नही लेते हो तो बीपी किडनी रोग मे बदल जाता है।

5 ) बच्चो से दूर रहने और पिनियल ग्रंथी मे गड़बड़ी से बुढ़ापे में नींद कम आती है। नींद में गड़बड़ी से तनाव और चिड़चिड़ापन आ जाता है।

6) नींद का उल्टा शब्द तनाव है। कम नींद होने से तनाव होता है। कुछ लोग को खूब नींद आती है। उससे डिप्रेशन होता है।

8 ) ऑस्टियोपोरेसिस : बुढ़ापे में हड्डियां खोखली और आसानी से टूटने लायक हो जाती है। थोड़ा सा गिरने पर फ्रैक्चर हो जाता है।

9) रात मे दो या अधिक बार पेशाब होना बूढापा की बिमारी नौकचुरिया है। बूॅद बूॅद कर पेशाब होना या धीरे-धीरे पेशाब उतरने को प्रोसटेट की बिमारी कहते है। दवाओ से इसका इलाज सम्भव है।

10) बूढापा मे भूलने की बिमारी विकसित हो जाती है। इसे डिमेनशिया और अलजाइमर कहते है। हर बात को लिख लेना इसका उपचार है।

11) बीपी की कमजोर दवा लेने के कारण कई बार यह उछल उपर आ जाता है। जिसके कारण लकवा मारने और ब्रेन हैमरेज यानी माथे मे खून का थक्का जैसी जानलेवा घटना हो जाती है।

आर.एन प्रसाद
rajeevnandanprasad@gmail.com

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