Health : भोजन पचने में हो रही है परेशानी तो अपनाएं ये उपाय…

डॉ जितेन्द्र सिन्हा, जसलोक अस्पताल (बजरा) रांची

रिटायर, निठल्ले और बुढे लोगो के पेट मे अधिक गैस बनता है, भोजन काफी देर से पचता है और छाती पर भारीपन रहता है। आमतौर पर इसे गैस की बिमारी मान कर गैस की गोली, डायजिन या इनो जैसी दवाएं ले ली जाती है। असल मे यह आंत की विशेष बिमारी है। जिसे गट मोटीलीटी यानी आतों का कम सिकुड़ना और फैलना कहते है। हमारी आतें ही भोजन को तोड़कर पचाने का काम करती है। आंत मस्तिष्क से जुड़ी होती है। जैसे ही हम कुछ खाते है दिमाग अपने संदेश वाहक सेरोटोनिन के माधयम से आतों को जल्दी जल्दी फैलने और पीचकने का आदेश देता है और आंतें ताबड़तोड़ पचाने मे लग जाती है। उम्र बढने या निठल्ला दिनचर्या के कारण कई बार मस्तिष्क ऐसे आदेश देना भूल जाती है। ऐसी हालत मे आंतें भी चुपचाप बैठी रहती है। फलत अपचा हुआ भोजन गैस और बदहजमी पैदा करने लगता है।

इस स्थिति मे यदि गैस रोकने की दवा या एनटासिड डायजिन ले लेते है तो भोजन का पचना और भी धीमा हो जाता है। गैस से तो मुक्ति मिल जाएगी किन्तु पेट मे तेजाब कम निकलेगा और भोजन के गलाने का काम धीमा हो जाता है। फिर कबजियत और गैस बनने का चक्र बन जाता है। प्रतिदिन गैस की गोली की जरुरत पड़ने लगेगी।

गैस कम करने के बजाय इस स्थिति मे आंतों को सक्रिय और दिमाग व आंतों के बीच संदेश स्थापित करने की व्यवस्था बनानी चाहिए। इसके लिए लिवोसरपराइड या डोमपेरीडोन जैसे प्रोकाइनेटिक दवाए सबसे उपयुक्त होती है। दवा के साथ साथ जीवन शैली मे बदलाव की जरुरत पड़ती है अन्यथा इन दवाओ का रोज सेवन करना पड़ता है। खाने में फाइबर यानी हरी सब्जियां, फल, सलाद, अंकुरित मूॅग और चना लेना चाहिए ताकि आंत स्थाई रुप से एकटीव हो जाए। रोज 8-10 गिलास पानी पीने से आंतों का डिटॉक्सिफिकेशन यानी तरोताजा रखने मे मदद मिलती है। यदि आपका पाॅकेट अनुमति देता हो तो रोज हर्बल टी, नींबू पानी या ग्रीन टी पीए। यह आंतो को तेजी से डिटॉक्सिफाई करेगा। प्रोबायोटिक हर तरह के आंत रोगो की बेहतरीन दवा है। सप्ताह भर एक गोली लेने से आंत जीवाणु मुक्त हो जाता है और पाचन तगड़ी हो जाती है। प्रोबायोटिक नही लेना चाहता तो कुछेक माह तक 100-200ग्राम दही ले। इस दवा का विकल्प है। पूरे पाचन तंत्र का सबसे बड़ा विलेन कोई है तो वह तनाव और निठल्ला जीवन है। पाचन को ठीक रखने के लिए शायरो ने भी ऐसा ही मशवरा दिया है।”कुछ न कुछ किया किजीए काम न हो तो कपड़े फाड़ कर सिला किजीए”

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