कब्रिस्तानों में जगह की पड़ी कमी तो लाशों को एक साथ दफन करने का जारी हुआ फतवा

– कोरोना की वजह से हो रही अधिक मौतों के चलते उलेमा और मुफ्तियों को लेना पड़ा फैसला 

नई दिल्ली
: कोरोना वायरस महामारी ने पूरे देश में विकराल रूप धारण कर लिया है। इस बीमारी की चपेट में आकर देशभर में रोज हजारों लोग अपनी जान गवां रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकारों की तरफ से लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इसके बावजूद बीमारी से निजात मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। देशभर के श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में शवों के अंतिम क्रिया के लिए लाइन लगी हुई है। यहां तक कि दिल्ली और मुंबई समेत कई कब्रिस्तानों में शवों को दफन करने के लिए जगह की कमी भी हो गई है। जगह की कमी को देखते हुए उलेमा और मुफ्तियों ने फतवा जारी करके एक कब्र में कई लाशों को दफन करने की इजाजत दे दी है।
इस सम्बन्ध में उलेमा और मुफ्तियों का कहना है कि महामारी और युद्ध के दौरान शहीद होने वालों को एक ही कब्र में एक साथ दफन करने की इस्लामी शरीयत ने इजाजत दी है और पैगंबर हजरत मोहम्मद ने भी अपने दौर में एक ही कब्र में कम से कम दो शवों को दफन करने का काम किया है। इसलिए मुसलमानों को कोरोना वायरस महामारी के शिकार होने वाले मुसलमानों की एक से अधिक लाशों को एक ही कब्र में दफन करने का काम करना चाहिए।
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के  महासचिव अल्लामा बुनाई हसनी का कहना है कि शरीयत ने इस बात की इजाजत दी है और पैगंबरे-इस्लाम ने भी अपने दौर में ऐसा किया है। इसका जिक्र हदीस में मौजूद है। इसलिए मुसलमानों को कब्रिस्तान में जगह की किल्लत को देखते हुए एक ही कब्र में कम से कम दो या उससे अधिक शवों को दफन करने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस्लामी शरीयत में हर तरह के माहौल और हालात को मद्देनजर रखते हुए उस पर चलने की हिदायत की गई है। इसलिए मुसलमानों को कोरोना वायरस महामारी के दौरान शवों को दफन करने को लेकर चिंतित या परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर जगह की किल्लत है तो कई शवों को एक ही कब्र में दफन किया जा सकता है।
इसी सिलसिले में मुफ्ती अब्दुल वाहिद कासमी दारुल इफ्ता ऑनलाइन फतवा दिल्ली ने एक फतवा जारी किया है। इसमें उन्होंने हदीसों का हवाला देते हुए कहा है कि महामारी में मरने और युद्ध के दौरान शहीद होने वालों को एक ही कब्र में दफन किए जाने की रिवायत मौजूद है। उनका कहना है कि पैगंबरे-इस्लाम ने भी अपने समय में ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि पैगंबर मोहम्मद ने एक ही कब्र में दो शवों को दफन किया है और उन्होंने लोगों से पूछा था कि इसमें से कुरान ज्यादा पढ़ा हुआ कौन है? लोगों ने जिसके बारे में ज्यादा कुरान पढ़ा होने के बारे में बताया, उसे उन्होंने नीचे लिटाया और उसके ऊपर कम कुरान पढ़े हुए व्यक्ति को दफन किया।
उनका कहना है कि जब इस्लाम में साफ तौर से इजाजत दी गई है तो मुसलमानों को इस पर अमल करना चाहिए और एक ही कब्र में कम से कम दो और ज्यादा से ज्यादा लोगों को दफन करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे कब्रिस्तान में जगह की जो किल्लत है, उसको दूर किया जा सकता है।

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