जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति गंभीर, रिहा किए जाएं हिरासत में लिए गए लोग : डिंगल

वॉशिंगटन। अमेरिका की सांसद डेबी डिंगल ने कहा है कि कश्मीर की मौजूदा स्थिति मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। अमेरिका की महिला सांसद डेबी डिंगल ने नवगठित केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नजरबंद लोगों को छोड़ने और संचार सेवाओं पर लगी पाबंदियों को हटाने की अपील करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कश्मीर के वर्तमान हालत मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने प्रतिनिधिसभा में इस संबंध में प्रस्ताव नंबर 745 पिछले साल पेश किया गया था। इसे कुल 36 लोगों का समर्थन हासिल है। इनमें से दो रिपब्लिकन और 34 विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी के सदस्य हैं। डिंगल ने सोमवार रात ट्वीट किया, कश्मीर की मौजूदा स्थिति मानवाधिकार का उल्लंघन है। अन्यायपूर्ण तरीके से हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है और लाखों लोगों की पहुंच इंटरनेट और टेलीफोन तक नहीं है। प्रस्ताव 745 पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, मैंने प्रस्ताव 745 पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि अमेरिका विश्व को बता सके कि हम इन उल्लंघनों को होता हुआ नहीं देखेगा। डिंगल मिशिगन का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह प्रस्ताव अभी आवश्यक कार्रवाई के लिए हाउस आफ फॉरेन अफेयर्स कमिटी के पास है। इस बीच, सांसद ब्रैड शेरमन ने कहा कि वह भारत में अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर की जम्मू-कश्मीर की हालिया यात्रा पर उनकी रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। शेरमन ने कहा, मुझे उम्मीद है कि रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाएगा कि जस्टर ने वहां क्या देखा। यह भी पता चलेगा कि राजदूत हिरासत में रखे गए लोगों से मिल पाए या नहीं। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद जस्टर समेत 15 देशों के राजनयिक मौजूदा स्थिति का मुआयना करने को श्रीनगर गए थे।

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