कानूनी परीक्षण में खरा उतरेगा गरीबों को दिया जाने वाला आरक्षण: जेटली

नई दिल्ली । वित्री और ख्यातिलब्ध अधिवक्ता अरुण जेटली ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय किया जाना गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के रास्ते में बाधक नहीं है।
सामान्य वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण दिए जाने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए जेटली ने कहा कि 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा संबंधी रोक केवल जातिगत आरक्षण पर लागू होती है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि आरक्षण की अधिकतम सीमा संविधान के अनुच्छेद-16 के खंड-4 के बारे में है, जिसमें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण जाति आधारित है। जेटली का तर्क था कि 49.5 प्रतिशत आरक्षण के बाद शेष 50 प्रतिशत हिस्से में से यदि गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है तो यह गैर कानूनी नहीं है।
जेटली ने कहा कि जातिगत आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय करने के पीछे उच्चतम न्यायालय की मंशा यह थी कि सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्रदान किए जाने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि शेष लोगों के साथ कोई भेदभाव न हो।
वित्तमंत्री ने गरीबों को आरक्षण देने के संबंध में पहले किए गए प्रयासों के असफल होने का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पीछे संविधान के मूल प्रावधानों से शक्ति न प्राप्त होना मुख्य कारण था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव ने केवल अधिसूचना जारी कर ऐसा किया था। कई अन्य राज्य सरकारों ने भी कानून बनाए थे लेकिन संविधान का अनुच्छेद-15 व 16 उन्हें इसके लिए इजाजत नहीं देता था।
जेटली ने कहा कि सदन में रखा गया यह संविधान संशोधन विधेयक गरीबों को आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए आवश्यक ठोस संवैधानिक ताकत प्रदान करता है।
वित्तमंत्री ने विपक्ष के नेताओं और कुछ कानूनविदों की इस राय को खारिज कर दिया कि गरीबों को आरक्षण देने का फैसला भविष्य में टिक नहीं पाएगा और उसे रद्द कर दिया जाएगा। जेटली ने कहा कि संसद को आरक्षण के लिए गरीबी को आधार माने जाने का प्रावधान करने का अधिकार है तथा 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा भी इस मामले में लागू नहीं होती।
जेटली ने कहा कि कांग्रेस के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वह गरीबों को आरक्षण देने की मोदी सरकार की पहल पर क्या रवैया अपनाती है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस विधेयक का खुले दिल से समर्थन करें। उन्होंने कांग्रेस के सदस्यों को उनके 2014 के चुनावी घोषणा पत्र की भी याद दिलाई, जिसमें इस प्रकार के आरक्षण का वादा किया गया था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) के एक सदस्य की टोका-टोकी पर उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात होगी कि कम्युनिस्ट भी गरीबों का विरोध कर रहे हैं।

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