पहली बार नागपुरी भाषा में बनी फिल्म फुलमनिया की धमक कॉन्स फिल्म फेस्टिवल तक, 16 को होगी स्क्रीनिंग


रांची । झारखंड में बनी दो फिल्मों की धमक एक साथ कॉन्स फिल्म फेस्टिवल 2019, फ्रांस में सुनाई देगी। इसमें नागपुरी भाषा में बनी फिल्म फुलमनिया और हिन्दी में बनी लोहरदगा शामिल हैं। दोनों फिल्मों की स्क्रीनिंग 15 और 16 मई को होगी। कॉन्स पहुंचने वाली फुलमनिया नागपुरी भाषा में बनने वाली पहली फिल्म है। पैसे लेकर अवॉर्ड बांटने का आरोप लगाते हुए झारखंड फिल्म फेस्टिवल का बहिष्कार करने के कारण पिछले दिनों सुर्खियों में रहे लाल विजय शाहदेव इन दोनों फिल्मों के निर्माता-निर्देशक हैं। शाहदेव आज सोमवार को फ्रांस पहुंच चुके हैं।

दोनों ही फिल्में झारखंड के ज्वलंत मुद्दे पर बनायी गयी हैं। नागपुरी भाषा में बनी फिल्म फुलमनिया में झारखंड की डायन बिसाही कुप्रथा काे दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के शाेषण और बांझपन के दर्द काे बहुत ही संवेदनशीलता के साथ परोसा गया है। फिल्म में रांची की काेमल सिंह मुख्य किरदार निभा रही हैं। इसके अलावा लोहरदगा बेरोजगार युवकों के नक्सली बनने की कहानी पर आधारित है। 20 साल का मनु सेना में जाना चाहता है, लेकिन एक एजेंट के चक्कर में फंसकर वह इस शर्त पर नक्सली बन जाता है कि समर्पण करने के बाद सरकार की नीतियों के अनुसार उसे नौकरी मिल जायेगी। पर, उसके साथ ऐसा कुछ नहीं होता है। अब वह पुलिस के हिट लिस्ट में है। वह साबित करता है कि वह नक्सली नहीं है।
शाहदेव ने बताया कि 15 मई की शाम 6 बजे लोहरदगा और 16 मई की सुबह 10 बजे नागपुरी भाषा में बनी फिल्म फुलमनिया का प्रीमियर कॉन्स फिल्म फेस्टिवल 2019 में होगा। झारखंड के ज्वलंत मुद्दे पर बनी दोनों फिल्में बॉलीवुड इंडस्ट्री को रास्ता दिखायेंगी कि कम बजट और सीमित संसाधन में भी बेहतरीन फिल्में बनायी जा सकती हैं। दोनों फिल्मों में झारखंड के 100 से अधिक कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। 
उल्लेखनीय है कि फुलमनिया फिल्म के निर्माता-निर्देशक लाल विजय शाहदेव मुंबई बेस्ड झारखंड के युवा फिल्मकार हैं। उन्हें दूसरी बार कॉन्स में मौका मिल रहा है। इससे पहले लोहरदगा के रहने वाले लाल विजय की पहली शॉर्ट फिल्म द साइलेंट स्टैचू भी 2016 में कॉन्स फिल्म फेस्टिवल में शामिल की गई थी। 

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