पहली बार कार्गो जहाज लेकर समुद्री यात्रा पर निकली महिला टीम

नई दिल्ली : देश में पहली बार कार्गो-जहाज ‘एमटी स्वर्ण कृष्णा’ को लेकर समुद्री यात्रा पर पूरी महिला टीम रविवार को निकली। मुंबई बंदरगाह से कप्तान सुनेहा गड़पांडे के नेतृत्व में 14 महिला अधिकारियों के साथ एमटी स्वर्ण कृष्णा को पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री मनसुख मांडविया ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इस मौके पर मांडविया ने सभी महिला अधिकारियों को बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक पल बताया। 

उल्लेखनीय है कि यह जहाज मुंबई से वदीनार के लिए निकला है। जहां कच्चे तेल से भरे कंटेनर को उतारने का जिम्मा भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सफर में तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए यह जहाज 10 मार्च को अपने गणतव्य पर पहुंचेगा। कार्गों जहाज में चालक दल में कप्तान सुनेहा गड़पांडे के साथ कप्तान अश्वथी पिल्लई, मुख्य अधिकारी उषा यादव, कर्पगवनी सेवाकुमार, अंशु प्रिया, स्नेहलता, अनुष्का अरुण सक्सेना, ध्रूवी पांडया शामिल हैं। इंजन संभालने में चीफ इंजीनियर दिव्या जैन, सीईओ सुप्रिया धोखे, नीतू सिंह, दिशानी गहलोत, खुशबू मनिक और श्रृष्टी सिंह वर्मा शामिल हैं। 
इस खास यात्रा पर निकले जहाज की मुख्य कप्तान सुनेहा गड़पांडे ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसके लिए नजरिया बदलना पड़ता है। इसलिए महिलाओं को हिम्मत करके कुछ नया करते रहना चाहिए तभी दुनिया में उनके लिए माकूल जगह बन पाएगी। महिलाओं पर भरोसा और मौका देने के लिए शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का धन्यवाद देते हुए कप्तान ने कहा कि महिलाएं पूरे सामर्थ्य के साथ काम रही हैं और जग में सकारात्मक बदलाव भी हो रहा है। साथ ही इससे समुद्रीय क्षेत्र में काम रही हैं महिला अधिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। 

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) की पहली महिला मुख्य कार्यकारी निदेशक एचके. जोशी ने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि कंपनी में हमेशा से महिलाओं को बराबरी का मौका दिया जाता है। इस पुरुष प्रधान क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी एवं उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए यह अच्छा मौका है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर यह पहल की जा रही है। इससे महिला नाविक भी अपनी प्रतिभा का लोहा सारे जग में मनवा पाएंगी और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकेंगी।
उन्होंने बताया कि एससीआई में महिला नाविकों और अधिकारियों की संख्या विश्व के औसतन दो प्रतिशत से अधिक है। यह क्षेत्र महिलाओं के लिए चुनौतियों से भरा जरूर है पर महिलाओं ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर सुमद्री क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 

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