ट्रम्प और बाइडन के बीच मंगलवार शाम पहली टीवी डिबेट

– निजी हमले ज़्यादा, मुद्दों पर बात कम होने की आशंका

– प्रवासी भारतीय भ्रमित हैं, किसे चुनें अपना नेता 

वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (3 नवम्बर 2020) के लिए रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेटिक चैलेंजर जोई बाइडन मंगलवार को टीवी पर पहली बार करोड़ों मतदाताओं के सम्मुख आमने-सामने होंगे।हालाँकि कोरोना के कारण इस बार की डिबेट पिछली सभी डिबेट से हटकर होगी। इसमें न तो परंपरागत हाथ मिलाने की रस्म अदायगी होगी और न ही डिबेट की शुरुआत करने के लिए एंकर की ओर से कोई भूमिका ही प्रस्तुत की जाएगी। 

इस चुनाव में प्रवासी भारतीयों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है। प्रवासी भारतीय मतदाता ट्रम्प और बाइडन को लेकर भ्रमित हैं। पिछले चुनावों में 60 प्रतिशत प्रवासी भारतीय डेमोक्रेटिक आए हैं, इस बार प्रवासी भारतीय ज़्यादा ही भ्रमित हैं। टीवी डिबेट के संचालनकर्ता क्रिस वैलेस सीधे पहला सवाल ट्रम्प की ओर प्रेषित करेंगे। इसके बावजूद विश्लेषकों का मत ​​है कि इस डिबेट में दोनों ओर से निजी हमलों की बौछार होगी। ट्रम्प अपने हमलों में जोई बाइडन को ‘चीन एजेंट’ के रूप में लपेटना चाहेंगे तो बाइडन की कोशिश होगी कि ट्रम्प को व्हाइट हाउस में और चार साल के लिए सत्तानशी करने का अर्थ देश को गर्त में डूबो देना होगा।  

क्लीवलैंड में आयोजित इस 90 मिनट की डिबेट में बेशक कोरोना महामारी से देश भर में दोलाख से अधिक लोगों की मृत्यु को लेकर डेमोक्रेट उम्मीदवार की ओर से तीखे प्रहार में ट्रम्प को संक्रमण से करोड़ों लोगों के रोज़गार जाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा तो ब्लैक लाइव मैटर, चुनाव से मात्र 40 दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति रूथ बेडर गिन्सबर्ग की मृत्यु  से रिक्त स्थान पर ताबड़तोड़ परंपरावादी जज एमी कोने बैरट की नियुक्ति पर रिपब्लिकन नेताओं की नियत पर संदेह भी व्यक्त किया जाएगा। यों,  इस डिबेट में ट्रम्प आक्रामक  भूमिका नज़र आएँगे।   

चुनाव पूर्व प्रमुख पोल सर्वे में ट्रम्प को लगातार बाइडन की तुलना में सात से 9 प्रतिशत अंकों तक हारते दिखाया जा रहा है। इस संदर्भ में डेमोक्रेट जोई बाइडन की घरेलू मुद्दों से लेकर रक्षा और विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर कोशिश होगी कि वह ट्रम्प से एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं।पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ दो बार उप राष्ट्रपति की भूमिका निभानेवाले जोई बाइडन चार दशक तक सिनेटर रहते हुए विदेश मामलों की समिति के अतिरिक्त विभिन्न समितियों में उच्च पदों पर रह चुके हैं।  

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