Health : कोरोना महमारी मे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाओ का फैशन…

डॉ जितेन्द्र सिन्हा
जसलोक अस्पताल
(बजरा) रांची

कोरोना महमारी मे प्रतिरोधक क्षमता (इमयुन) बढाने की दवाओ का मानो फैशन आ गया है। आयुर्वैदिक दवाओ की मानो मौजा ही मौजा। च्यवनप्रास, गिलोए, गौमूत्र और काढा लेने के जब इतने प्रयास हो रहे है तो कोरोना दुगने रफ़्तार से क्यो बढ रहा है? आइए विज्ञान के चश्मे से इस फर्जीवाड़ा को समझे।

प्रतिरोधक क्षमता बढाना एक जटिल और लम्बी प्रक्रिया है।इतना सरल होता तो पश्चिमी देश कोरोना के वैक्सीन के बजाय एक आलराउंडर वैक्सीन बना देते। पूरी दुनिया को सभी वायरस से एक साथ मुक्ति मिल जाती। मालूम हो कि वैक्सीन हमारे इमयुन को बढा कर ही वायरस पर विजय पाता है। भारत एक मात्र देश है जहां इमयुन बुसटर, मर्दानगी बढाने और बुढापा रोकने की दवाएं होती है। गुलाब के फूल से शरबते आजम बनता है। सिनकारा पीकर दुबला पतला आदमी दिवार तोड़ देता है। इन तमाशा के पीछे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की एक रोचक नियमावली है। जिसके तहत आयुर्वेद की उन दवाओ को इमयुन बुसटर और ताकत बढाने की दवा का लाइसेन्स दे दिया जाता है जो किसी काम का न हो। ऐसा आयुर्वेद को बढावा देने के लिए लाया गया है। विश्व स्वास्थय संगठन के तर्ज पर ट्रायल कर साबित करने और दुनिया मे बिकने के लिए समान लाइसेन्स की कोई व्यवस्था नही है। इसी कारण विदेशो मे आयुर्वेदिक दवाओ को कोई नही पूछता। हाल मे एक बाबा भी कोरोना को शुभअवसर मान कर गंगा मे हाथ धोना चाह रहे थे। मिडिया मे विवाद इतना बढा कि आयुष मंत्रालय ने इमयुन बुसटर कहकर जान छुड़ा लिया। ऐसे लाइसेन्स देना हम सभी के लिए सेफ है। आधी आबादी अनपढ है। जो पढे लिखे है, वो क्या बिगाड़ लेंगे। तौलते रहे। कितना इमयुन बढा। बूढ़े लोग आइना पर सर पटकते रहे -कब हम जवाॅ होगे।

विज्ञान की पुस्तकों मे इमयुन बढाने के कुछेक सरल नियम है। घर से बाहरी वातावरण के धूल कण और गन्दगी सेशरीर को बचाना और उसेसाबुन, सप्रीट या सैनीटाइजर से साफ करना पहली शर्त है। स्वाइन हो या कोरोना हाथ को बार बार धोने की बात कही जाती है। साबुन या शैंपू से स्नान करने से बाल और खुले अंगों मे चिपके वायरस धुल कर बाहर हो जाते है और इमयुन वायरस से लड़ने से बच जाता है।रिसर्च मे साबित हो चुका है कि अच्छी नीन्द के दौरान इमयुन बढाने वाले टी कोशिका बढते है।इसलिए रोज 6घन्टे गहरी नीन्द मे सोना चाहिए। फल ,नींबू और हरी सब्जियों मे विटा कैरोटिन और विटामिन सी होते है।कोरोना के महामारी मे सबजी और फल ज्यादा मात्रा मे खाना चाहिए।मेट्रो शहरो मे सब्जी महंगी होती है इसलिए साथ मे मल्टीविटामिन की गोलो ले ले।यह सच है कि केमिकल से बने विटामिन प्राकृतिक सब्जियों के विटामीन के बजाय कम प्रभावी होते है क्योकि केमिकल विटामिन को शरीर स्वीकार ही नही करता।धूप प्रतिरोधक शक्ति बढाता है ।धूप मे न निकलते हो तो विटामिन डी की गोली ले सकते है।सन्तुलित भोजन जिसमे बराबर मात्रा मे रोटी,
दाल,सब्जी,दही पनीर या अण्डा और सलाद हो ले।इससे इमयुन बढता है।शराब और सिगरेट इमयुन के दुश्मन माने जाते है।कोरोना के समय शराब से बचे।

यदि बार बार इनफैकशन और बुखार होता हो तो समझे इमयुन कमजोर है ।डायबीटीस,60 वर्ष से उपर वाले लोग,हृदयरोगी ,बीपी के मरीज और 14वर्ष से कम वाले बच्चो का इमयुन कमजोर होता है।ऐसे लोगो के प्रतिरोधक शक्ति को बहुत जोर लगाकर विषाणु से लड़ना पड़ता है।कोवीड की दवाएं नही है ,केवल आक्सीजन सहारा होता है ताकि प्रतिरोधक शक्ति को मार करने का वक्त मिल जाए।

This post has already been read 5975 times!

Sharing this

Related posts