प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है दीव टापू

जब पर्यटन की बात आती है तो हम घुमने के लिए हर समय कुछ नया, देखना चाहते हैं जहां की प्राकृति हमें अपने से बांध ले। गुजरात की मुख्य भूमि से सटा हुआ है छोटा सा यह टापू देश के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है दीव। करीब 38 किमी का यह टापू प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। अगर आप प्रदूषित पर्यावरण से दूर शुद्ध व साफ हवा में कुछ दिन गुजारना चाहते हैं तो दमन और दीव आपका एक पसंदीदा ठिकाना हो सकता है। दीव का किला दीव में यों तो प्राकृतिक सुंदरता ही इतनी है कि उसे देखते रहने और महसूस करने में ही वक्त बिताया जा सकता है। फिर भी यहां कई मानवनिर्मित दर्शनीय स्थल भी हैं।

दीव का किला

इनमें प्रमुख है दीव का किला। इसको खंभात (गुजरात) के राजा बहादुर शाह ने बनवाया था और बाद में पुर्तगालियों ने भी इसमें कुछ बदलाव किए। तीन तरफ से अरब सागर से घिरा यह किला दिल्ली के लाल किले से सौ साल से अधिक पुराना है। इस किले में सामान, शस्त्र वगैरह पहुंचाने के लिए नहर बनी है। समुद्र से जुड़ी नहर किले के अंदर घूमती आती है। पहले किले के भंडारघर, रसोईघर, शस्त्रागार आदि सभी प्रमुख स्थलों तक इसके ही जरिये नावों से सामान पहुंचाया जाता था। किले की छत से समुद्र और पूरे टापू का विहंगम दृश्य नजर आता है। छत पर अभी भी रखी कई तोपें आकर्षक लगती हैं। इनमें अष्टधातु की बनी एक तोप अनूठी है। आठ धातुओं को मिलाकर इसे बनाया गया है। इसीलिए यह तोप मई-जून की तपती धूप में भी गर्म नहीं होती। इसी किले में बने प्रकाश स्तंभ से पूरे टापू का विहंगम नजारा भी दिखता है। किले में पुर्तगाली योद्धा डाम नूनो डी कुन्हा की कांस्यमूर्ति लगी हुई है।

मंदिर, पहाड़ और समुद्रतट

यहां 1610 में निर्मित सेंट पॉल चर्च भी दर्शनीय है। पुर्तगाली स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने इस चर्च में ईसा मसीह की संगमरमर की सुंदर प्रतिमा है। खाड़ी के मुहाने पर ही विशाल पत्थर की शिलाओं से निर्मित पानीकोट का दुर्ग है। किसी पानी के जहाज से लगने वाले इस दुर्ग में जलमार्ग से मोटरबोट आदि से ही जाया जा सकता है। यहां भी एक प्रकाश स्तंभ और गिरजाघर है। यहां आप गंगेश्वर और जलंधर मंदिर भी जा सकते हैं। सागर तट पर बने गंगेश्वर मंदिर में चट्टानों के बीच शिवलिंग स्थापित है। समुद्र की गरजती, गूंजती लहरें जब इस शिवलिंग का स्पर्श करती हैं तो लगता है जैसे वे इसका अभिषेक कर रही हों। जलंधर बीच स्थित छोटी सी पहाड़ी पर बना देवी चंडिका मंदिर भी दर्शनीय है। दीव की असली खूबसूरती उसके पहाड़ और सुंदर समुद्रतट हैं। यहां का सबसे सुंदर समुद्रतट नगोआ बीच है। चक्रतीर्थ बीच सूर्यास्त के लिए प्रसिद्ध है। यहां से सूर्यास्त का दृश्य देखना वाकई अविस्मरणीय होता है। इसके निकट स्थित पहाड़ी पर ओपेन एयर थियेटर है। नहाने के लिए मीठे पानी का इंतजाम है और है मौज-मस्ती। दो शाखाओं वाला ताड़ जगह-जगह खिले फूल इस पूरे टापू को अनूठे रंगों और खुशबुओं से भर देते हैं। दीव को होम्का ताड़ के रूप में प्रकृति ने एक और अनूठी चीज दी है। ताड़ की यह इकलौती प्रजाति है जिसका पेड़ ऊपर जाकर किसी गुलेल सा दो शाखाओं में बंट जाता है। किसी-किसी पेड़ में तीन शाखाएं भी उग आती हैं। होम्का ताड़ सिर्फ दीव में ही होता है।

कैसे पहुंचें

नगोआ बीच के सामने ही दीव का हवाई अड्डा है, पर यहां सीमित विमान सेवाएं ही मुंबई, पोरबंदर, अहमदाबाद आदि से उपलब्ध हैं। रेल से जाना हो तो निकटतम स्टेशन केरावल 80 किमी और पोरबंदर स्टीब 100 किमी है। यहां से टैक्सियों, बसों आदि से दीव पहुंचा जा सकता है।

कब जाएं

साल में किसी भी वक्त दीव जाया जा सकता है। गर्म कपड़ों की जरूरत कभी नहीं पड़ती। हां, मई-जून में दीव की सैर कर रहे हों तो पीने का पानी साथ रखें।

खाना-पीना

चूंकि यह पर्यटन स्थल है इसलिए यहां खाने-पीने की सभी चीजें उपलब्ध हैं। सी फूड, कांटिनेंटल, साउथ इंडियन, नॉर्थ इंडियन, चाइनीज, मुगलई आदि। दीव में स्थानीय दस्तकारी की चीजों के अलावा समुद्र से निकली सीपियों और दूसरी चीजों से बनी सजावटी चीजें ही खरीदी जा सकती हैं।

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