Health : दवा लेने के बावजूद शुगर कम नहीं हो रहा है तो ये खबर जरूर पढ़े…

दवा लेने के बाबजूद डायबीटीस के मरीजो मे शुगर का कन्ट्रोल नहीं रहना आम समस्या है। दवा का इस तरह फेल होना को इनसुलिन रेसिसटेनश कहते है। जिसका मतलब है कि शरीर शुगर को कनट्रोल करने वाली इनसुलिन का उत्पादन तो भरपूर हो रहा है किन्तु इन्सुलिन मोटे चर्बी को पार कर पेट, जाॅघ जैसे जगहो तक नही पहुंच नहीं पा रहा है फलस्वरूप शुगर और इन्सुलिन का मिलन नहीं हो रहा है।

डॉ एस के निराला, द्वारिका अस्पताल महिलौग (रांची)

दवा के फेल होने के पीछे एक और कारण है- खाने मे बदपरहेजी। मरीज के खाने का पैटर्न समझकर डाक्टर हल्की या तेज दवा सेट करते है। दवा लेकर शुगर कन्ट्रोल हो जाता है फिर मरीज उन्मुक्त होकर भोजन करने लगते है। जिससे शरीर मे अधिक शुगर बनने लगता है और दवा कम पड़ने लगता है। सिर्फ दवा के बल पर शुगर का कन्ट्रोल असम्भव है। मरीज को चावल, चीनी और आलू को पूरी तरह बन्द करना आवश्यक है। अन्यथा ये खून मे इतना अधिक शुगर का निर्माण कर देगे कि जखीरा लगाकर भी शुगर को नियंत्रित नही कर सकते ।

दवा का चुनाव के पहले डाक्टर मरीज के चटोरेपन को समझते है। जिन मरीजो मे हल्का फुलका डायबीटीस हो और खान पान मे अनुशासन रखा जाता हो तो मेटफोरमिन पहली पसंद होता है। शुगर कम करने के अलावा यह वजन भी घटाता है। 250 -300 प्वाइन्ट पर पहुंचे हुए शुगर को टेनिलागिलपटिन, विलडागिलपटिन, लिनगागिलपटीन या सिटागिलपटिन जैसी दवा से कन्ट्रोल किया जाता है।

कई लोगो के शुगर 400 – 600 के बीच पहुंच जाता है। ऐसे मे एसजीएलटु इनहिबिटर नामक दवा का चुनाव किया जाता है। यह दवा पेशाब करने वाले सिसटम को सक्रिय कर देता है। पेशाब की विशेषता है कि शुगर बढते ही यह पानी के पम्प की तरह शुगर को बाहर करने लगता है। शुगर कम होते ही पेशाब नॉर्मल हो जाता है। इसी सिद्धान्त पर इस दवा को बनाया गया है। इनसुलिन रेजिजटेनश जो शुगर कन्ट्रोल न होने का प्रमुख कारण है, मास्टर स्ट्रोक
पायोगिलटाजोन है। आखिरी दवा इनसुलिन है। केवल इन्जेक्शन के रुप मे रहने के कारण और थोड़ा मॅहगा होने के कारण लोग इसे पसंद नही करते। इसे डायबीटीस का रामबाण कहते है।

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