देशभर के सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें दिल्ली में

नई दिल्ली । एक बार फिर दिल्ली की सड़कें पूरे देश में सबसे खतरनाक साबित हुई हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा पिछले साल देशभर में हुए सड़क हादसों के विश्लेषण से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में पिछले साल सबसे ज्यादा लोगों को सड़क हादसों में अपनी जान गंवानी पड़ी। तमाम कोशिशों के बावजूद राजधानी में सड़क हादसे कम होने के बजाय और बढ़ रहे हैं। इस रिपोर्ट ने यहां की अथॉरिटीज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

दिल्ली में 2017 के मुकाबले रोड एक्सिडेंट्स की तादाद में 5.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामलों में 6.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो बेहद चिंताजनक है। ओवर स्पीडिंग और खराब सड़कें इसके पीछे की दो प्रमुख वजहें रहीं हैं। हर बार की तरह इस बार भी सड़क हादसों के सबसे ज्यादा (45.86 प्रतिशत) शिकार पैदल चलने वाले ही हुए हैं, जबकि दूसरा नंबर (33.72 प्रतिशत) दुपहिया वालों का है। दिल्ली में सबसे ज्यादा 15.26 प्रतिशत हादसों को कार चालकों ने अंजाम दिया, जबकि ट्रकों व अन्य भारी वाहनों से 11 प्रतिशत हादसे हुए। हादसों में मारे जाने वाले सबसे ज्यादा 48 प्रतिशत लोग 18 से 35 साल के थे, जबकि 35 से 45 साल वाले लोगों की तादाद भी 21.6 प्रतिशत रही। ओवर स्पीडिंग ने सबसे ज्यादा 64.4 प्रतिशत जानें लीं, जबकि रॉन्ग साइड पर ड्राइविंग, ड्रंकन ड्राइविंग और मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना, ये सड़क हादसों के अन्य तीन प्रमुख कारण बनकर उभरे।

सेव लाइफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी का कहना हैकि रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल देशभर में सड़क हादसों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है, जो बेहद चिंताजनक है। उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उनन राज्यों में हुईं, जहां मोटर वीइकल एक्ट में हुए अमेंडमेंट्स का विरोध करते हुए जुर्माना नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने मांग की है कि ताजा आंकड़े सामने आने के बाद अब सभी राज्यों को गंभीरता के साथ मोटर वीकल एक्ट में हुए बदलावों को सख्ती से अपने यहां लागू करना चाहिए।

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