Health : सन्तान होने में विलम्ब और कठिनाई? कहीं ये कारण तो नहीं…

इन दिनो विवाह के बाद नव दम्पतियो को सन्तान होने मे विलम्ब और कठिनाई देखने को मिल रहा है।ब्रिटिश मेडिकल जरनल के मुताबिक, पिछले पचास साल में पुरुषो मे सन्तान उत्पति के शुक्राणुओं की संख्या घटकर आधी रह गई है।इसी कारण सन्तान उत्पति मे दिककत आ रही है। पुरुष निसंतानता से ज्यादा ग्रसित क्यो है।आइए इसे समझे।

डॉ जितेन्द्र सिन्हा जसलोक अस्पताल (बजरा) रांची

गरम वातावरण मे काम करने वाले लोग जैसे हलवाई, सुनार ,फैकट्री ,भट्टी मे काम करने वाले कर्मचारियों के अण्डकोष में शुक्राणु की संख्या में गरमी के कारण गिरावट हो जाती है।जो निसंतान होने का पहला कारण है।लंगोट पहनने वालो के शुक्राणुओं की संख्या और वीर्य में कम होने लगता है।

इसके अलावा जंक फूड, फास्ट फूड का ज्यादा सेवन करने से शुक्राणुओं की मोटिलिटी में कमी आ जाती है।मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन तथा पैरों पर लैपटॉप रख कर काम करने वाले पुरुषों में भी शुक्राणुओं की कमी आ जाती है।

शराब ,धूम्रपान एवं नशा भी स्पर्म कम कर देता है।अधिक उम्र मे शादी भी निसंतान होने का एक कारण है। उम्र बढने से स्पर्म की संख्या व गुणवत्ता में कमी आ जाती है। मर्द के मोटापन से स्पर्म बनने में दिक्कत आती है।

निसंतान पुरुष के ईलाज एक लम्बी और जटिल प्रक्रिया है जिसमे डॉ को शुक्राणु की अनेक जांच करनी होती है। इसके अन्तर्गत स्पर्म काउंट, स्पर्म मोटीलिटी, स्पर्म मोर्फोलोजी, स्पर्म वाईटेलिटी, शुक्राणु की मात्रा, गतिशीलता और उसकी गुणवत्ता चेक की जाती है। संक्रमण या इनफैकशन भी मालूम किया जाता है। पुरुष के टेस्टोस्टीरोन हार्मोन की कमी तो नहीं यह भी देखा जाता है।

इसके अलावा डाकटर मरीज के हिसट्री को खॅगालते है। मरीज कहीं स्टीरॉयड, कीमोथैरेपी, एंटीफंगल दवा फलुकनाजोल का अधिक उपयोग तो नहीं कर रहा है। उससे भी स्पर्म की संख्या में कमी आती है। यौन संक्रमित बीमारियां और असुरक्षित यौन संबंध भी निसंतान होने का कारण है। मम्स, टीबी, ब्रूसिलोसिस, गोनोरिया, टाइफाइड, इंफ्लुएंजा, स्मॉलपॉक्स भी स्पर्म काउंट को कम करते हैं।

निसंतानता का इलाज में काफी धैर्य की जरुरत होती है। इसके बाद भी चिकित्सक 100% सफलता की गारंटी नही दे पाते। कुछेक मामलो में कारण का सही सही पता नहीं चल पाता।

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