मुड़ने वाले हड्डीयों के टुटने पर प्लास्टर से जोड़ने का अर्थ है- जीवन भर अपंगता:

डा एस एन यादव
हड्डी और ज्वाइंट रोग विशेषज्ञ
मां रामप्यारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
बरियातु (रांची)

सड़क दुर्घटना ,जानवर के पटक देने के बाद वृक्ष और सीढी से गिरने के बाद प्रायः कोहनी, उंगलियां और कंधा टुट जाते है।कंधा ,कलाई ,उॅगली और केहुना मे ज्वाइंट या जोड़ होता है।जिसके सहारे हमलोग हाथ और बाहों को मोड़ते है।भूलवश इन अंगों पर प्लास्टर लगा दिया जाए तो मरीज को जीवन भर अपाहिज रहने की नौबत आ सकती है क्योंकि प्लास्टर लगने से हड्डी के साथ जोड़ भी आपस में जुड़ जाते हैैं। जिससे उसका मुड़ना बन्द हो जाता है।

जोड़ के आस पास के अंगों के फ्रैकचर को हमेशा आर्थोस्कोपी सर्जरी द्धारा जोड़ा जाता है।आर्थोस्कोप दुरबीन युक्त एक मशीन है।इसे सी आर्म भी कहते है।सी आर्म में एक पतला धातु का ट्यूब होता है।जिसमे विडियो कैमरा और रोशनी लगा होता है।हम लोग एक छोटा सा चीरा लगाकर टूयूब को कन्धे और केहुना के जोड़ तक ले जाते है।जिससे स्क्रीन पर बड़ा चित्र आ जाता है।इसे देखकर टुटे फुटेकोशिकाओं और हड्डीयो का रिपेयर कर दिया जाता है

टुटे फुटे जोड़ सिर्फ इसी मशीन से जोड़ा जाता है।मशीन मे कम चीरा लगने कारण इनफैकशन कम होता है और कम एंटीबायोटिक की जरुरत होती है ! आपरेशन के 24 घंटे बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और 1-2 सप्ताह मे मरीज अपने दैनिक काम करने लायक हो जाता है।

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