राशन की दुकानों में मिलेंग सस्ते आलू,प्याज

नई दिल्ली। सरकार ने अगर नीति आयोग की सिफारिशें मान लीं तो फिर राशन की दुकानों में सब्सिडी रेट पर प्याज, आलू और टमाटर मिलेंगी। नीति आयोग ने सरकार को दी एक रिपोर्ट में कहा है कि खाद्य महंगाई दर में उतार-चढ़ाव का असर गरीब लोगों पर न पड़े, इसके लिए बेहतर होगा कि पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में चावल, गेहूं, चीनी के साथ प्याज, आलू तथा टमाटर को भी शामिल कर लिया जाए। राशन की दुकानों में तय मात्रा में इसको सब्सिडी रेट पर गरीबॉन को दिया जाए। इससे सबसे अधिक यह फायदा होगा।

अगर किसी भी कारण से प्याज, आलू तथा प्याज की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने पर इसका असर गरीब तबके पर नहीं पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार इस बारे में सरकार जल्द ही फैसला ले सकती है। यह भी संभव है कि एक ‌फरवरी को पेश होने वाले बजट भाषण में इस बात का उल्लेख वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करें। वह इस बात का भी संकेत दे सकती हैं कि सरकार इस सिफारिश पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि हाल ही में रिटेल मार्केट में प्याज के दाम 150 रुपये के पार चले गये थे। आलू ने भी 50 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया था। मौजूदा समय में प्याज, रिटेल मार्केट में 70 से 80 रुपये प्रति किलो पर बेची जा रही है। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्याज, आलू तथा टमाटर का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। इसके दामों में बढ़ोत्तरी से आम आदमी पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

ऐसे में गरीब आदमी इससे काफी परेशान होता है। बेहतर होगा कि गरीब परिवार के लिए इन तीन उत्पादों को पीडीएस प्रणाली के तहत लाया जाए। दरअसल सरकार इस समय खाद्य उत्पादों की कीमतों के साथ बढ़ती रिटेल महंगाई दर से भी परेशान हैं। प्याज, आलू, टमाटर के दाम बढ़ने के कारण दिसंबर में रिटेल महंगाई दर 7.35 फीसदी पर पहुंच गई। इसने पांच साल का रेकार्ड तोड़ दिया। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए नीति आयोग से प्रस्ताव मांगें थे। इसके जवाब में नीति आयोग ने यह प्रस्ताव दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार नीति आयोग के इस प्रस्ताव को लागू कर सकती है।

इससे सरकार पर वित्तीय तौर पर कुछ बोझ तो पड़ेगा, मगर इससे उसे राजनीति मोर्चे पर काफी लाभ होगा। इकॉनॉमी स्लोडाउन के इस दौर में सरकार महंगाई दर, खासतौर पर खाद्य उत्पादों की महंगाई को कोई मुद्दा नहीं बनना देना चाहती है। वह चाहती है कि खाद्य उत्पादों की कीमतें अगर बढ़ें भी तो गरीब तबके पर इसका ज्यादा असर न हो। इधर एक सीनियर अधिकारी के अनुसार अगर प्याज, आलू व टमाटर को पीडीएस में शामिल करने में सबसे बड़ी समस्या है, राशन की दुकानों तक इसको पहुंचा। इसके लिए सरकार को नेटवर्क तैयार करना होगा।

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