युवाओं में कमर दर्द की समस्या

डा जितेंद्र सिन्हा
हड्डी और नस रोग विशेषज्ञ
जसलोक अस्पताल
इटकी रोड (बजरा)

कमर दर्द आमतौर पर बुढ़ापे की समस्या मानी जाती है। पिछले कुछ वर्षों मे २५ से ४० वर्ष के नौजवान तबका कमर दर्द की समस्या से अधिक प्रभावित हैं।इसके पीछे आधुनिक जीवन शैली को मुख्य रूप से जिम्मेवार है।

मोटे गद्देदार फोम पर सोना और सोफे और गाड़ियों मे मोटे-मोटे तकिये का प्रयोग समृद्धि का प्रतिक माना जाता है।जो पीठ के मांसपेशियों में खिंचाव और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बनाते हैं। वर्क फ्राम होम और लौक डाउन ने कम्प्यूटर के साथ पूरे दिन काम करना, घर में बैठे रहना और होम डिलीवरी जैसी चीजें दी है जो तेजी से मोटापा ला रहा है ।पेट पर अधिक चर्बी लिगामेंट में खिंचाव और कमर दर्द का कारण है।एक बार मोटापा चढ़ जाने पर युवा छरहरा दिखने के लिए जिम जाने लगते हैं जहां अपने से दुगने और तीन गुना वजन के डम्बल को उठाना होता है।शरीर को आगे और पीछे स्ट्रेच कर झुकाना होता है।ये सभी कमर दर्द का कारण बनते हैं

आश्चर्य की बात तो यह है कि स्कूल जाने वाले बालक भी कमर दर्द के खूब शिकार हो रहे हैं।इसके पीछे स्कूल का भारी बस्ता और बैग मुख्य कारण है। जिसे स्कूल के तीसरे और चौथे तल पर चढ़ाते हैं।मेधावी बच्चे ९०% से अधिक नम्बर लाने की होड़ में ९-१० घंटे एक स्ट्रेच में झुककर पढ़ाई करते हैं जो लिगामेंट और मांसपेशियों में खिंचाव लाता है।

उम्र दराज होने पर पुरुषों के तुलना मे महिलाएं कमर दर्द की अधिक शिकार होती है।महावारी बन्द होते ही औरतों के हार्मोन में बदलाव होता है जिससे महिलाएं चीड़ चीड़ी हो जाती है।अधिक पसीना चलता है और शरीर मे कैलसियम की कमी होने लगती है। जिससे पीछे तरफ की हड्डीया खोखली होने लगती है ।यह कमर दर्द का कारण है

दो महीने से अधिक कमर दर्द रहे तो उसे क्रोनिक या स्थाई कमर दर्द कहते हैं। इतने दिन दर्द निवारक (NSAID) नहीं दिया जा सकता है।किडनी को नुक्सान पहुंच सकता है। ऐसे में हड्डी रोग विशेषज्ञ रीढ़ के विशेष बिन्दु को पहचान कर एक विशेष तरह की दवा देते है‌जो कमर दर्द से स्थाई रुप से मुक्ति देता है। इसे ब्लाकेज कहा जाता है

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