एसीएल रिकंस्ट्रक्शन : स्पोर्ट्स इंजुरी का झटपट ईलाज

डा एस एन यादव
हड्डी रोग विशेषज्ञ
मां रामप्यारी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल

फुटबॉल, बास्केटबॉल, जिम्नास्टिक्स जैसे खेल में दौड़ने के दौरान जोर से कूदने,अचानक रुक जाने और पीछे की तरफ घूम जाने से घुटनों पर सीधा आघात पहुँचता है। जिससे कई बार घुटनों में तेज दर्द और स्थाई सूजन आ जाता है। ऐसे में दर्द निवारक दवाएं काम नहीं करती क्योंकि ऐसे चोट में एसीएल लिगामेंट चोटिल हो जाते हैं।

घुटना ऐसी जगह है जहाँ पर जांघ और पिंडली की हड्डी चार लिगामेंट्स की सहायता से मिलती है, और पूरे शरीर के वजन को उठाकर चलने की शक्ति देता है। चारों लिगामेंट में सबसे महत्वपूर्ण एसीएल होता है।इसके चोटिल होने पर चलना नामुमकिन हो जाता है।

एसीएल के चोटिल होने पर एक विशेष सर्जरी द्वारा टुटे फुटे हिस्से को हटा दिया जाता है।टुटे हुए एसीएल को हटाने के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ शरीर के अन्य हिस्से से मांसपेशी काटकर नए लिगामेंट का पुर्निर्माण करते है। ऐसे आप्रेशन को एसीएल रिकंस्ट्रक्शन कहते हैं।

एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सिर्फ आर्थोस्कोपी मशीन से छोटे चीरा लगाकर किया जाता है।ठीक होने की दर इतना अधिक होता है, कि जिस दिन आप्रेशन होता है,उसी शाम मरीज वैशाखी लेकर चलने लगता है। दो दिन के अन्दर मरीज अपने घर चला जाता है। मरीज केवल एक हफ्ते के अन्दर स्वतन्त्र रूप से पैदल स्कूल या आफिस जाने लगता है।९ माह के अन्दर खिलाड़ी लोग पहले की तरह खेल कूद और दौड़ लगाना शुरू कर देते है।

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