यूपीए की नीति के प्रतीक हैं माल्या, नीरव

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण में तर्क और तथ्य तलाशना आसान नहीं होता। वह दूसरे को बेईमान बताते हैं, अपशब्दों का प्रयोग करते है। हालांकि इसके मद्देनजर वह अपनी पार्टी को निर्दोष साबित करने में विफल रहते हैं। वह आर्थिक भगोड़ा की बात करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी का अतीत सामने आ जाता है। इस समय उनके भाषण से लगता ही नहीं कि वह कांग्रेस के नेता हैं। ऐसा लगता है कि कार्ल मार्क्स नए रूप में सामने आ गए हैं। राहुल के भाषण में अम्बानी, विजय माल्या,नीरव मोदी पर हमला होता है, और वंचित वर्ग के लिए उनकी हमदर्दी संभाले नहीं संभल रही है। लेकिन यह कहने से वह खुद कठघरे में आ जाते हैं। सवाल है कि क्या विजय माल्या, नीरव मोदी, अम्बानी आदि कांग्रेस के शासन में खाली हाथ थे। इनमें विजय माल्या, नीरव मोदी, चौकसी तो कांग्रेस की कृपा से दौलत में खेलने लायक बने थे। भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा था कि माल्या के हमेशा कांग्रेस के साथ अच्छे संबंध रहे और कांग्रेस तथा उनके रीट्वीट से यह बात खुलकर सामने आयी थी। उसे सारा धन कांग्रेस शासन काल के दौरान ही मिला। मनमोहन सिंह सरकार ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। दो हजार तेरह में रिजर्व बैंक के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर डॉ. केसी चक्रवर्ती ने कहा था कि एक करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटालों का हिस्सा 2004-05 और 2006-07 के बीच 73 प्रतिशत था, जो 2010-11 और 2012-13 में 90 प्रतिशत हो गया। रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट, 2017 के अनुसार एक लाख से ऊपर के घोटाले का कुल मूल्य पांच वर्षो में करीब नौ हजार,700करोड़ से बढ़कर 16 हजार.777 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2016 -17 में घोटाले की कुल राशि का 86 प्रतिशत हिस्सा कर्जों से जुड़ा था। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी राजग सरकार को जब बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों यानी एनपीए का पता लगा तो सरकार ने इसमें सुधार का बीड़ा उठाया। एनपीए एक तरह से फंसे हुए कर्ज होते हैं। मोदी सरकार ने यह फैसला लिया है कि उनकी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 50 करोड़ रुपये से अधिक के सारे एनपीए खातों की जांच करने और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर इसकी सूचना सीबीआई को देने का निर्देश दिया। साथ ही पीएमएलए, फेमा और अन्य प्रावधानों के उल्लंघन की जांच के लिए उन्हें प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया को भी जिम्मेदारी दी गई। इससे निगरानी प्रक्रिया मजबूत होगी। उधर, रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को स्विफ्ट प्रणाली को कोर बैंकिंग प्रणाली के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। अमित शाह ने भी कहा कि विजय माल्या, निराव मोदी आदि को कांग्रेस की सरकार ने फोन से कर्ज दिए थे। वे कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान नहीं भागे क्योंकि वे तब की सरकार से साठगांठ कर चुके थे। लेकिन मोदी सरकार आई तो वे घबरा गए कि कहीं जेल की सलाखों के पीछे न रहना पड़े। इस लिए भागे। एनपीए तो विपक्षी दल के पूर्ववर्ती शासन के कुकर्म का परिणाम है। राहुल गांधी अपनी चुनावी सभाओं में नीरव मोदी, विजय माल्या के कर्ज लेकर विदेश भागने का मुद्दा उछालते हैं। अब जो एनपीए हो रहे हैं वह कांग्रेस शासन में, आपके भ्रष्टाचार से दिए गए कर्ज के हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विजय माल्या ने इस ऋण का दुरुपयोग किया और इसे विदेशों में ट्रांसफर कर दिया। जब एयरलाइंस डूब रही थी, तब माल्या और बैंक अधिकारियों के बीच कई बैठके भी हुईं। सीबीआई ने अपनी जांच को प्रवर्तन निदेशालय के साथ साझा किया है। उसने हाल ही में किंगफिशर, विजय माल्या और आईडीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2009 में एयरलाइंस को लोन दिया गया जिसे कई चरणों में ट्रांसफर किया गया। नौ सौ करोड़ के लोन के प्रस्ताव को किंगफिशर ने जमा करवाया था। नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि एनपीए का जो हल्ला मच रहा है, वो पहले की सरकार में बैठे अर्थशास्त्रियों की इस सरकार को दी गई सबसे बड़ी लायबिलिटी है। गुरुवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि मार्च 2008 में बैंकों ने 18 लाख,16000 करोड़ रुपये की कुल राश‍ि लोन पर दी थी। मार्च 2014 तक यह बढ़कर 52 लाख,15000 करोड़ रुपये हो गया। वहीं इस बीच जीडीपी में बढ़ोतरी नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार ने गलत तरीके से कर्ज दिए थे। कई एनपीए अकाउंट को यूपीए शाासनकाल में छुपाकर रखा गया। मोदी सरकार ने 2015 में एसेट क्वॉलिटी रिव्यू किया था। उसने कॉरपोरेट को लोन वापस करने के लिए बाध्य करने के प्रावधान किए। जाहिर है कि विजय माल्या, नीरव मोदी आदि को लेकर कांग्रेस का वर्तमान सरकार पर हमला आंख में धूल झोंकने जैसा है। कांग्रेस को लगता है कि जनसामान्य उनकी बात पर विश्वास करेगा लेकिन यह उंसकी गलतफहमी है।

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