मेटोबॉलिज्म को धीमा करता है मेटाबोलिक सिंड्रोम

-डॉ. आशिष भनोत-

सिलिम ट्रिम दिखना किसे पंसद नहीं होता है। आज हर दूसरा व्यक्ति कम से कम एक दो किलो वजन तो घटाना ही चाहता है और इसके लिए जी-तोड़ मेहनत भी करता है। लेकिन कुछ दिनों बाद सारी कोशिशें बेकार हो जाती हैं। कई बार तो हम कमर के बढ़ते साइज के लिए अपने मेटाबॉलिज्म को ही जिम्मेदार ठहरा देते हैं। इससे दिल को संतोष तो मिल जाता है, मगर मन-मुताबिक फिगर नहीं मिल पाता. हम सब जानते हैं कि हमारी सेहत चाहे जिस स्थिति में हो, उसके लिए हम और हमारी आदतें ही जिम्मेदार होती हैं। हमारा खानपान न केवल हमारी सेहत को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर में ऊर्जा संचालन की पूरी प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। यहां तक कि हमारी सोच और हमारे विचार काफी हद तक हमारे खाने-पीने की आदतों पर निर्भर करते हैं। इसलिए किसी दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने से बेहतर होगा कि खुद कुछ किया जाए. कुछ ऐसा जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी मजबूत करे. मेटाबॉलिज्म शरीर में कैलोरी और उसके खर्च को संतुलित करता है। यानी हम जो भी खाते हैं, उसे ऊर्जा में परिवर्तित कर उसका सही उपयोग कराने का काम हमारा मेटाबॉलिज्म ही करता है।

क्या है मेटाबोलिक सिंड्रोम
मेटाबोलिक सिंड्रोम कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण होता है। शरीर में कॉलेस्ट्राल, रक्तचाप, मोटापा और इंसुलिन से लडने वाली प्रतिरोधी तत्वों का विकास न होने के कारण शुगर स्तर अनियंत्रित हो जाता है। जिन लोगों में मेटाबोलिज्म सिंड्रोम होता है उनके निकट भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग, हृदयाघात होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

कारण
लेकिन तेज भागती जिंदगी में हम सबसे ज्यादा इसी से समझौता कर बैठते हैं। भूख लगने पर बर्गर, चिप्स, पिज्जा आदि जैसे फास्टफूड का सहारा ले लेते हैं। आसानी से उपलब्ध होने वाली ये सारी चीजें खाने में भले ही चटपटी और स्वादिष्ट लगती हैं, मगर असल में ये हमारे मेटाबॉलिज्म पर सबसे ज्यादा वार करती हैं। उस पर हमारी दिनचर्या रही-सही कसर भी पूरी कर देती है। पूरे दिन कंप्यूटर के सामने सिर खपाने के बाद हम सीधे बिस्तर की ओर कूच कर जाते हैं। ऐसे में शारीरिक गतिविधियों का समय ही नहीं मिलता और फास्ट फूड से ली गई भारी भरकम कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी को सबसे ज्यादा नुकसान होता है तो वो हैं हम खुद. लेकिन ये बात भी उतनी ही सच है कि हम अपनी दिनचर्या के साथ ज्यादा कुछ नहीं कर सकते. रोज ऑफिस जाना ही होगा और कंप्यूटर के सामने उतना ही समय देना होगा.

कैसे हो सकता है नियंत्रित
जीवनशैली में बदलाव लाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वजन कम होने, ज्यादा से ज्यादा शारीरिक श्रम करने, खानपान पर नियंत्रण और धूम्रपान छोडने से मेटाबोलिज्म को असंतुलित होने से बचाया जा सकता है। तो ऐसे में क्या करें, जिससे हमारी सेहत भी सुरक्षित रहे और मेटाबॉलिज्म भी मजबूत हो जाए. यहां कुछ ऐसे ही उपाय दिए गए हैं…

थोड़े-थोड़े अंतराल में खाना खाएं
प्रोटीन कैलोरी बर्न करने में दोगुना ज्यादा मदद करती है, इसलिए अपने खाने में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करें, जो प्रोटीन से भरपूर हों. मलाई हटाकर दूध और दही, फैट फ्री चीज, मूंगफली, अंडे का सफेद भाग, मछली आदि खाने में हेल्दी हैं और स्वादिष्ट भी. ये सारी चीजें प्रोटीन से भरपूर हैं। मगर इसके साथ एक बात का ख्याल रखना होगा कि खाने की गुणवत्ता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसकी मात्रा भी है। एक बार में खूब सारा खाना हमारे पाचन तंत्र को धीमा कर देता है और हमारा मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है। डाइटीशियन की मानें तो खाना हमेशा कई छोटे-छोटे टुकड़ों में खाना चाहिए. नाश्ते में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें. फलों और सब्जियों में ऐसा बहुत कुछ है, जो हमारे शरीर को ऊर्जा देता है और कैलोरी जमा भी नहीं होने देता. इससे मेटाबॉलिज्म को भी काफी मजबूती मिलती है। अक्सर स्वाद अच्छा होने पर हम कई बार अपनी क्षमता से ज्यादा खा लेते हैं और फिर बाद में पछताते हैं। ज्यादा खाने की हमारी आदत ही मोटापे का कारण बनती है। पूरे दिन में कम से कम एक या दो फल जरूर खाना चाहिए. खाने में सलाद को शामिल करें. ज्यादा तली-भुनी चीजों से परहेज करें. इससे मेटोबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर को सुस्त कर देता है। हमारे आसपास खाने-पीने की अथाह चीजें हैं, लेकिन हमें उनमें से सिर्फ हेल्दी चीजों का ही चुनाव करना है। खाना समझदारी से खाया जाए तो शरीर में बीमारियों का नहीं, स्फूर्ति का राज रहता है।

कई मर्जों की दवा पानी है…
मेटाबॉलिज्म को गति देने के लिए यह सबसे अच्छा उपाय है। डॉक्टरों के मुताबिक एक व्यक्ति को पूरे दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना ही चाहिए. पानी हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है, शरीर से एसिड बाहर निकालता है, पसीने के रूप में शरीर से गंदगी बाहर निकालता है। पानी जितना हमारे जीवन के लिए जरूरी है, उतना ही जीवन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को अपना मेटाबोलिज्म दुरुस्त रखना है तो उसे खूब सारा पानी पीना चाहिए.

एक्सरसाइज भी है जरूरी
हर दिन का व्यायाम हमारी मांसपेशियों को ताकतवर बनाने के साथ-साथ अतिरिक्त कैलोरी जला देता है। लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि हर तरह के व्यायाम सबके लिए नहीं होते. व्यायाम करने के लिए अनुशासन और निरंतरता जरूरी है, अन्यथा इसका नतीजा उल्टा भी हो सकता है। इसलिए हमेशा व्यायाम के लिए किसी एक्सपर्ट से सलाह लें. शरीर फिट बनाए रखने के लिए योगासन भी काफी कारगर होता है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और एकाग्रता भी बढ़ती है। इससे मेटाबोलिज्म तेज होता है और ताजगी महसूस होती है।

बेस्ट है रेस्ट करना भी
अच्छे मेटाबॉलिज्म के लिए आराम के तौर पर अच्छी नींद जरूरी है। कम-से-कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लें. दरअसल सोने के दौरान शरीर लेप्टीन नामक हार्मोन बनाता है, जो खाने की लालसा कम करता है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है। यदि आप रात को जल्दी और समय से सो जाएंगी तो रात में चिप्स, पॉपकोर्न आदि खाने से बच जाएंगी, जो आपके मेटाबोलिज्म के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुबह उठकर एक गिलास बिना मलाई वाला दूध पिएं या ग्रीन टी भी पी सकती हैं। एक कप कॉफी भी सुबह के नाश्ते में शामिल कर सकती हैं। सुबह नाश्ते में दो से तीन गेहूं के आटे की रोटियां, दो अंडे, एक कप पपीता खाएं. नाश्ते व खाने के बीच के समय में फल या दही खा सकती हैं। दोपहर 12 बजे एक कप ग्रीन टी लें, इसमें थोडम नीबू का रस मिला लें.

बनाए शरीर को फुर्तीला
बढ़ती उम्र के साथ हमारा मेटाबॉलिज्म खुद धीमा हो जाता है। लेकिन इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। शारीरिक गतिविधियों और संतुलित आहार की सहायता से हम इसे गति में ला सकते हैं। सुबह उठकर एक गिलास पानी पिएं, लिफ्ट की जगह सीढियों का इस्तेमाल करें, आसपास के काम के लिए पैदल जाएं, कुछ देर के अंतराल पर टहलें, खाना खाने के बाद टहलें, सुबह मॉर्निंग वॉक करें. ये सारे उपाय आपको और आपके मेटाबॉलिज्म को हमेशा फिट रखेंगे.

(डॉ. आशिष भनोत अपोलो स्पेक्ट्रा हास्पिटल्स में चीफ बैरिएट्रिक सर्जन है।)

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