फिल्म ‘एक्सीडेंटल’ नहीं लगती

डॉ. प्रभात ओझा

बॉलीवुड में आम तौर पर शुक्रवार को ही फिल्में रिलीज हुआ करती हैं, 11 जनवरी को भी शुक्रवार है। फिल्में आती हैं, रिलीज होने के पहले उनका ट्रेलर भी आता है। फिल्म के नायक- नायिका और गीत संगीत को लेकर चर्चा अधिक होती है। इस क्रम में 11 जनवरी को भी एक फिल्म रिलीज होने जा रही है। किसी नई फिल्म में यह सब है, तो नया क्या? हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं, वह कुछ अलग वजहों से चर्चा में है। फिल्म आने के दो हफ्ते से भी पहले उसका ट्रेलर क्या आया, चर्चा विवाद की सीमा तक पहुंच गई। आखिर यह ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ जो है। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की इसी नाम से पुस्तक आई थी, विवाद तब भी हुआ था। फिर भी किताब और फिल्म में अंतर हुआ करता है। किताब के पाठक और फिल्म के दर्शक के अनुपात को आसानी से समझा जा सकता है। फिर ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ खुद डॉ. मनमोहन सिंह हैं। अपने कार्यकाल और उसके बाद भी मनमोहन सिंह अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहे। फिल्म के बारे में उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस और उसकी तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी की उस मजबूरी का ज्यादा उल्लेख होगा, जिसके कारण उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाया था। अब फिल्म का ट्रेलर जो बता रहा है, साफ है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने अनुकूल रखने के लिए कांग्रेस परिवार, खासकर सोनिया गांधी ने क्या-क्या जतन किए होंगे। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते गांधी परिवार ने कितने दबाव बनाये, प्रधानमंत्री उन दबावों से कैसे बचने की कोशिश करते रहे, एक पीएम किस तरह देशहित-पार्टी हित और एक खास परिवार-हित के बीच सामंजस्य बनाये रखने की कोशिस करता रहा, ट्रेलर उन सबकी झलक दे गया है। इतना कांग्रेस पार्टी के नेताओं और गांधी परिवार के परेशान होने के लिए काफी है। इसके विपरीत गांधी परिवार शुरू में मौन साधे रहा। बोल रहे हैं, पार्टी के युवा नेता। महाराष्ट्र युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने रिलीज के पहले इसे दिखाने की मांग की है। आरोप लगाया गया है कि फिल्म के जरिए कांग्रेस और गांधी परिवार को बदनाम करने की साजिश है। कांग्रेस सांसद पीएल पूनिया भी चुनावी वर्ष में इसे लोगों का ध्यान भटकाने की साजिश करार देते हैं। वह जिक्र भले न करें, फिल्म को भाजपा के अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करना उन्हें बोलने का मौका देता है। ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध कलाकार अनुपम खेर वर्तमान प्रधानामंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे हैं। कहते हैं कि कांग्रेस को तो खुश होना चाहिए कि उनके नेता पर फिल्म बनी है। वह कहते हुए दिखाए गये हैं कि मैं देश को बचाऊंगा। अनुपम खेर का अगला वाक्य जरूर एक खास ओर इशारा करता है, जब वह कहते हैं- पीएम के कितने उम्मीदवार तो बेल पर बाहर हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने राज्य में फिल्म पर प्रतिबंध से इंकार किया है। ट्रेलर आने के दूसरे ही दिन खबरें आ रही थीं कि कांग्रेस शासित राज्यों में इस पर विचार किया जा सकता है। अनुपम खेर कहते हैं, ‘जितना ज्यादा वह (कांग्रेस) फिल्म का विरोध करेंगे, फिल्म को इससे उतनी ही लोकप्रियता मिलेगी। किताब 2014 में रिलीज हुई थी तब से अब तक कोई प्रदर्शन नहीं हुआ था जबकि फिल्म उसी पुस्तक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’पर आधारित है।’ खेर यह भी जोड़ते हैं, ‘हाल ही में मैंने राहुल गांधी जी का ट्वीट पढ़ा था, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उन्होंने बोला था। तो मुझे लगता है कि उनको डांटना चाहिए उन लोगों (विरोध करने वालों) को कि आप गलत बात कर रहे हो।’ फिल्म के राजनीतिक चर्चा में आने का कारण यह भी है कि फिल्म के ट्रेलर को ट्विटर पर साझा करते हुए भाजपा ने लिखा, “इस फिल्म की कहानी बड़ी दिलचस्प है जो बताती है कि कैसे एक परिवार ने 10 सालों तक देश को बंधक बनाकर रखा था। क्या डॉक्टर सिंह केवल तब तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे जब तक कि उसका राजनीतिक शासक तैयार न हो जाए? ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का आधिकारिक ट्रेलर देखिए जो अंदरूनी सूत्र के हवाले पर आधारित है। फिल्म 11 जनवरी को रिलीज हो रही है।” फिलहाल, भाजपा फिल्म को देखने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, कांग्रेस के कुछ ही नेता सही, विरोध कर रहे हैं। ऐस में फिल्म को देखने वालों की भीड़ तो होगी है। फिलहाल, पहले-दूसरे दिन ही मीडिया जो दिखा रहा था, लगता है कि फिल्म एक्सीडेंटल नहीं है।

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