झारखंडः 2014 के मुकाबले वर्ष 2018 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों का प्रतिशत घटा

रांची। झारखंड सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में स्वीकार किया कि मैट्रिक परीक्षा की उत्तीर्णता का प्रतिशत 2014 की तुलना में वर्ष 2018 में कम हुआ है। कांग्रेस के सुखदेव भगत के एक अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में राज्य की कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि वर्ष 2014 में मैट्रिक की परीक्षा में छात्र-छात्राओं के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 75. 30 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2015 में यह प्रतिशत 71.20, वर्ष 2016 में 67.54 और वर्ष 2017 में 57.91 प्रतिशत रहा। वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2018 का परीक्षाफल बेहतर रहा है और 59.48 प्रतिशत विद्यार्थी मैट्रिक की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। वर्ष 2018 में सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा आयोजित की गई। मरांडी ने बताया कि वर्ष 2014 में मैट्रिक की परीक्षा में 3 लाख 60 हजार पांच छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए थे। जबकि 2018 में केवल दो लाख 54 हजार 830 छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए। उन्होंने कहा कि झारखंड अद्यिविद परिषद (जैक) में उपलब्ध पंजीयन/मांगपत्र डाटा के अनुसार लगभग तीन लाख छात्रों का नामांकन/मांगपत्र परिषद को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के परीक्षाफल में सुधार के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजियोर निर्धारित कर इसके कार्यान्वयन के लिए सभी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया गया है। झारखंड अद्यिविद्य परिषद द्वारा सीबीएसई की प्रकिया को राज्य में लागू किया जा रहा है। स्टेप मार्किंग किया जा रहा है। वर्ष 2019 से कॉपी मूल्यांकन तथा प्रवेक्षण अलग किया जा रहा है। सभी विषयों में 20 प्रतिशत अंक विद्यालय के मूल्यांकन के आधार पर देय होगा।

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