कितनी संयमित रही अयोध्या नगरी

अमित शंकर श्रीवास्तव

बीते साल 2018 में राम नगरी अयोध्या का दीपोत्सव खास रहा। यहां अंतरराष्ट्रीय उत्सव के साथ तीन लाख एक हज़ार एक सौ बावन दीपों को एक साथ जलाने का विश्व रिकॉर्ड बना। यह नगरी इसलिए भी सुर्खियों में रही, क्यों कि यहीं राम मंदिर आंदोलन को लेकर सियासत का अखाड़ा भी बना रहा। तमाम हिंदूवादी संगठनों ने अलग अलग तरीकों से राम मंदिर आंदोलन को धार देने की कोशिश की। सब ने अलग अलग तरीके से मंदिर निर्माण में हो रही देरी के प्रति अपना अपना आक्रोश व्यक्त किया। एक समय तो ऐसा आया कि मंदिर आंदोलन के प्रति एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ सी शुरू हो गई। फिर तो धार्मिक अनुष्ठान हो, सभाएं हो या प्रवीण भाई तोगड़िया की सक्रियता या फिर तपसी छावनी में आमरण अनशन, सभी ने राम मंदिर मामले पर संसद में अध्यादेश लाने का दबाव सरकार पर बनाने की कोशिश की। इसी कड़ी में शिवसेना ने भी अयोध्या में ‘पहले मंदिर, फिर सरकार’ का नारा बुलंद किया। इन तमाम बढ़ते विरोध के बीच भाजपा, संघ व विहिप ने भी अयोध्या में विराट धर्म सभा का आयोजन कर यह साबित करने की कोशिश की कि वह भी जल्द मंदिर निर्माण चाहते हैं। इस धर्म सभा में लगभग डेढ़ लाख राम भक्त अयोध्या पहुंचे और अध्यादेश लाने के लिए सरकार से मांग की। पूर्व में आमरण अनशन कर चुके तपसी छावनी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत परमहंस दास ने 6 दिसंबर को आत्मदाह करने की भी घोषणा कर दी। वे ऐसा कर पाते, इसके पूर्व ही अयोध्या पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल का रास्ता दिखा दिया। पूरे साल अयोध्या में सरकार द्वारा विकास की विभिन्न घोषणाओं की भी बारिश होती रही। फैजाबाद का नाम अयोध्या हुआ तो संपूर्ण राम नगरी खुशी से झूम उठी। दीपोत्सव के दौरान जहां रूस, त्रिनिडाड, इंडोनेशिया, लाओस, श्रीलंका, कंबोडिया की रामलीला मंडलियों ने रामलीला का मंचन किया तो रामायण संस्कृति की व्यापकता प्रदर्शित हुई। इंडोनेशिया के मुस्लिम कलाकारों द्वारा रामलीला की प्रस्तुति में गंगा- जमुनी तहजीब का नजारा दिखा, वहीं सरयू तट पर सुदर्शन पटनायक ने रेत पर भगवान राम की आकृति बनाकर सभी को आकर्षित किया। हरिद्वार व काशी की तर्ज पर नित्य सरयू आरती की परंपरा भी शुरू हुई, तो योगी सरकार ने भी सरयू नदी की सफाई व घाटों के निर्माण व सुंदरीकरण का बीड़ा उठाया। इसके साथ साथ भगवान श्री राम की 151 मीटर ऊंची प्रतिमा लगाने का निर्णय लेकर अयोध्या को अपने विकास के एजेंडे में विशेष स्थान देने की कोशिश की। साथ ही राज्य सरकार ने अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में 200 करोड़ रुपये का बजट सिविल एयरपोर्ट के लिए स्वीकृत किया। मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या में आयोजित वैचारिक समरसता कुंभ में भरोसा जताया कि दुनिया में जब भी मानवता के कल्याण को प्रशस्त करने का मार्ग भारत से निकलेगा तो अयोध्या उसकी आधार भूमि हो सकती है। योगी के मुताबिक, अयोध्या ने पहले भी इस तरह के कार्य को नेतृत्व दिया है। समरसता कुंभ में देशभर से लगभग 3000 विद्वानों ने भाग लेकर विश्व समुदाय में अंतरराष्ट्रीय एकता एवं वसुधैव कुटुंबकम् की संकल्पना का संदेश दिया। नया साल देश की सियासत के लिए भी बहुत ही अहम होगा। जहां एक तरफ राम भक्तों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार होगा, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार को भी अपने पांच साल का हिसाब देकर जनादेश प्राप्त करना है। इन सबके बीच नए साल के शुरुआत में ही प्रयागराज में आयोजित होने वाला कुंभ भी सामाजिक समरसता का परचम लहराएगा। फिलहाल, अयोध्या इस ऐतिहासिक अवसर को शांत भाव से आत्मसात कर रही है।

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