कहानी : झूठ मत समझना

-रतन लाल जाट- रचना तुम कैसी हो? तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है? और हाँ, कभी मैं आऊँगा तुमसे मिलने। यह बात कभी फोन पर हुई थी रमन की। रमन और रचना ने एक-दूजे को कभी देखा नहीं है। पर कोई यह नहीं कह सकता है कि वे आपस में अपरिचित हैं। दोनों के बीच कहने को दूरी है। वरना दोनों को एक-दूसरे के बारे में पल-पल की खबर है। अभी रचना कोचिंग से आ गयी होगी। कुछ देर बाद रूम पर आकर आराम करेगी और उसके बाद खाना बनायेगी।…

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आईसीयू में देश (व्यंग्य)

-दिलीप कुमार सिंह- एक साहित्यकार राजधानी में था राजधानी सबको जाना ही पड़ता है। मीडिया में जो खबरें बहुत दिनों से आ रही थीं। उनके वास्तविक मायने जानने की उसे उत्सुकता थी। वो भी उनको जानना चाहता था जो ये दावा करते रहते हैं कि वो सब कुछ जानते हैं। किसी ने काफी हाउस बुलाया और कहा कि यहीँ बैठो फिर आगे सोच-विचार करते हैं कि क्या करना है सर्वज्ञों को जानने के लिए। साहित्यकार वहाँ पहुंचा तो बहुत से लिपे-पुते चेहरे वहाँ बनाव-श्रृंगार किये खिलखिला रहे थे। उन्होंने काफी…

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(व्यंग्य) हमें खेद है

-मनोहर पुरी- कनछेदी के हाथ में न्यायालय की मोहर लगे सरकारी लिफाफे को देख कर मैं उसी प्रकार चौंक पड़ा था जैसे कोई मां अपने बच्चे के हाथ में पकड़े हुए सांप को देख कर चौंकती है। कनछेदी के बासी बैंगन जैसे लटके हुए मुहं ने मुझे और भी अधिक चिन्तित कर दिया था। सोचा न जाने कनछेदी किस पुलिसिया मुसीबत में फंस गया है। पुराने जमाने में जिस प्रकार गांव में किसी के घर तार आने पर मातम छा जाता था वैसी ही कुछ मुर्दनी कनछेदी के मुखमण्डल पर…

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यात्रा वृतान्त : देह ही देश

किताब : देह ही देश -यात्रा वृतान्त लेखिका : गरिमा श्रीवास्तव प्रकाशक : राजपाल ऐंड सन्ज कीमत : 285 रु. ‘मैं गिनती ही भूल गई कि मेरा कितनी बार बलात्कार किया गया। होटेल के सारे कमरों में ताले लगे रहते, वह खिड़की के रास्ते हमें रोटी फेंकते जिसे हमें दांतों से पकड़ना पड़ता क्योंकि हमारे हाथ तो पीछे बंधे रहते थे। सिर्फ बलात्कार के वक्त ही हमारे हाथ खोले जाते…। हमारी देह को सिगरेट से जलाया जाता, चाकू से जीभ का टुकड़ा काट लिया जाता।’ यह लाइनें हैं लेखिका गरिमा…

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कहानी: पापा तुम कहां हो

-अलका प्रमोद- बाहर जोरों की आंधी आई थी मानो टीन और छतों को सामना करने के लिए ललकार रही हो। खिड़की की झिर्री से प्रवेश करती वायु विचित्र-सी सीटी के समान ध्वनि उत्पन्न कर रही थी, कि तभी आंधी के कारण बिजली चले जाने से वातावरण और भी रहस्यमय हो उठा। इतने बड़े घर में एकाकी बैठे रामेश्वर जी का हृदय अज्ञात आशंका से कांप उठा वह सोचने लगे कि यदि इस भयावह रात में उन्हें कुछ हो जाय तो वह किसे पुकारेंगे? उनकी हृदय गति रुक जाए तो पता…

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पुस्तक समीक्षा: स्वच्छ भारत समृद्ध भारत

नई सरकार बनने के पश्चात समस्त भारत में एक नारा दिया गया स्वच्छ भारत समृद्ध भारत। यह नारा मात्र राजनीतिक रूप से न सही लेकिन भारतीय जनमानस और उसकी भौतिक वस्तुस्थिति का मुल्यांकन करने के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है। 21वीं सदी में भारत को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर अग्रणी श्रेणी में पहुंचाने की अभी भी उम्मीद बची हुई है। इस उम्मीद को व्याव्हारिक स्तर तक पहुंचाने के लिए यहां की वस्तुस्थिति पर भी नजर डालना बहुत आवश्यक है। भारत में हर वर्ष गर्मी और सर्दी से…

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(कहानी) रोशनी का टुकड़ा

-अभिनव शुक्ल- सूरज की किरणें आकाश में अपने पंख पसार चुकी थीं। एक किरण खिड़की पर पड़े टाट के परदे को छकाती हुई कमरे के भीतर आ गई और सामने की दीवार पर छोटे से सूरज की भांति चमकने लगी। पीले की बदरंग दीवार अपने उखड़ते हुए प्लास्टर को संभालती हुई उस किरण का स्वागत कर रही थी। बिस्तर पर पड़े-पड़े अनिमेष ने अपनी आंखें खोल कर एक बार उस किरण की ओर देखा और फिर आंखें मूंद कर उस अधूरे सपने की कड़ियों को पूरा करने की उधेड़बुन में…

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रेलगाड़ी (कहानी)

-अजय कुमार गुप्ता- यह जीवन तो एक रेलगाड़ी के सदृश्य है, जो एक स्टेशन से चलकर गंतव्य तक जाती है। न जाने कितने स्टेशनों से होकर गुजरती है। मार्ग में अगणित पथिक आपके साथ हो लेंगे और अगणित सहयात्री आपसे अलग हो जाएंगे। कुछ सहयात्री लंबी अवधि के लिए आपके साथ होंगे, जिन्हें अज्ञानवश हम मित्र-रिश्तेदार समझते हैं, परंतु शीघ्र ही वे भी अलग हो जाएंगे। लंबी अवधि की यात्रा भी सदैव मित्रतापूर्वक नहीं बीत सकती, तो कभी कोई छोटी-सी यात्रा भी आपके जीवन में परिवर्तन ला सकती है, संपूर्ण…

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कहानी: गली नंबर दो

-अंजू शर्मा- पुत्तर छेत्ती कर, वेख, चा ठंडी होंदी पई ए। बीजी की तेज आवाज से उसकी तंद्र भंग हुई। रंग में ब्रश डुबोते हाथ थम गए। पिछले एक घंटे में यह पहला मौका था, जब भूपी ने मूर्ति, रंग और ब्रश के अलावा कही नजर डाली थी। चाय सचमुच ठंडी हो चली थी। उसने एक सांस में चाय गले से नीचे उतारते हुए मूर्तियों पर एक भरपूर नजर डाली। दीवाली से पहले उसे तीन आर्डर पूरे करने थे। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों से घिरा भूपी दूर बिजली के तार पर…

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कहानी: तीसरा बटन

-सुशील यादव- आज कालेज कैंपस में सन्नाटा पसरा है। 3 छात्रों की पिकनिक के दौरान नदी में डूब जाने से अकस्मात मौत हो गई। सभी होनहार विद्यार्थी थे। हमेशा खुश रहना व दूसरों की मदद करना उन की दिनचर्या थी। वे हमारे सीनियर्स थे। कालेज का फर्स्ट ईयर यानी न्यू कमर्स को भीगी बिल्ली बन कर रहना पड़ता था। न्यू कमर्स का ड्रैस कोड, रोज शेविंग करना, सीनियर्स को देख कर नजरें चुपचाप कमीज के तीसरे बटन पर ले जाना अनिवार्य लेकिन अघोषित नियम था। इस नियम को न मानने…

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