फालुन दाफा–जीवन में स्वास्थ्य और सामंजस्य का मार्ग

तेज रफ़्तारजीवन में हम सभी एक रोगमुक्त शरीर और चिंता और तनाव से मुक्त मन की इच्छा रखते हैं. किन्तु जितना हम इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करते हैं, उतना ही यह दूर जान पड़ता है. ऐसा लगता है कि परिवार की समस्याओं, नौकरी के दबाव, अंतर-व्यक्तिगत संघर्ष और हमारे करीबी और प्रिय लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कोई अंत नहीं है.आज के जीवन की समस्याओं के लिए क्या हमारे पास कोई हल है? दुनिया भर के लाखों लोगों ने फालुन दाफा (जो फालुन गोंग के नाम…

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(व्यंग्य) पितृपक्ष में एक पुण्यात्मा

-वीरेन्द्र सरल- जब एक पुण्यात्मा चित्रगुप्त जी के दफ्तर में पन्द्रह दिन के लिए अर्जित अवकाश का आवेदन लेकर प्रवेश किया तो चित्रगुप्त जी चैंक गये। उन्होने पूछा-ये सब क्या है। आप इतने लम्बे समय तक स्वर्ग से बाहर रहेंगे तो स्वर्ग का क्या होगा, पता है आपको? पुण्यात्मा ने कहा-सर आज पता नहीं कैसे अचानक मेरे दिमाग मे यह विचार आया कि अभी जम्बूद्वीप, आर्यवर्त, देव भूमि और ना जाने क्या-क्या नाना अलकंरणों से अलकृंत मेरे देश में पितृ पक्ष का पर्व चल रहा है। मैंने सुना है कि…

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समझदार जज (कहानी)

-लेव तोल्सतोय- बहुत पहले की बात है। अफ्रीका में एक देश है अल्जीरिया। बाउकास वहां के राजा थे। उनके राज्य में एक समझदार जज थे-जो झट से दूध-का-दूध और पानी-का-पानी कर देते। कोई भी मुजरिम उनकी पैनी आंखों से नहीं बच पाता। उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। एक दिन राजा ने भेष बदल कर खुद जज की परीक्षा लेने की सोची। वो घोड़े पर सवार होकर जज के शहर की ओर चले। शहर के मुख्य दरवाजे पर उन्हें एक अपंग भिखारी दिखा। राजा ने उसे कुछ पैसे दिए। भिखारी…

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खूबसूरत त्वचा के लिए खास आयुर्वेदिक टिप्स

यहां हम कुछ चुनिंदा आयुर्वेदिक नुस्खों का जिक्र करे रहे हैं, जिनका उपयोग करके सालों से महिलाएं अपना सौंदर्य निखारती आई हैं। आजकल अधिकांश लोग खुद को खूबसूरत बनाने के लिए ढेरों कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें इन प्रोडक्ट के रिएक्शन भी झेलने पड़ते हैं। साथ ही, त्वचा पर कई दूरगामी नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें अब अपनी जड़ों तक जाना होगा, यानी सदियों से चला आ रहा परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान अपनाना होगा। आज हम कुछ चुनिंदा…

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प्रकृति प्रेमी हैं तो इन क्षेत्रों में बना सकते हैं करियर…

कुछ लोगों के लिए ऑफिस में एसी में बैठकर काम नहीं कर सकते। ये जॉब जैसे कि उनके लिए बने ही नहीं हैं। अगर आप इस तरह के व्येक्ति हैं कि कम्यूूसर टर के सामने आठ घंटे नहीं बैठ सकते तो हो सकता है ये काम आपने लिए हो जहां आपको प्रकृति के करीब रहने का मौका मिलें। जी हां, अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं… लैंडस्केप आर्किटेक्ट:- लैंडस्केप आर्किटेक्ट पार्क, घर, कैम्पेस, रिक्रिएशनल सेंटर और अन्य ओपन स्पेसेस के लिए लैंड एरिया…

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ऐतिहासिक इमारतों और बहुसांस्कृतिक सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है हैदराबाद

भारत के प्रमुख नगरों में से एक हैदराबाद अपनी ऐतिहासिक इमारतों और बहुसांस्कृतिक सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है। आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद तेलंगाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हिन्दू और मुसलमान के एकता और भाईचारे का प्रतीक यह शहर सूचना क्रांति के क्षेत्र में भी अग्रणी है। कुतुब शाही वंश के संस्थापक कुली कुतुब शाह ने 1591 ईसवी में मूसी नदी के किनारे हैदराबाद शहर बसाया था। 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान कुतुब शाही सल्तनत का यहां शासन था। उसके बाद कुछ समय तक यहां मुगलों का भी…

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बीमारियों और बुराइयों को जन्म देता है क्रोध

हममें से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे क्रोध या गुस्सा कभी भी न आता हो। क्रोध एक प्रकार का संवेग या भावना है। जिस प्रकार व्यक्ति दुःख, सुख, घृणा आदि महसूस करता है, उसी प्रकार क्रोध भी महसूस करता है। प्रायः बहुत से लोगों को कहते सुना जा सकता है कि उन्हें गुस्सा बहुत आता है। वे किसी मामूली-सी बात पर भी बहुत अधिक गुस्सा हो जाते हैं और गुस्से के समय वे अपना संतुलन तक खो देते हैं। क्रोध में किसी भी व्यक्ति का अच्छा काम भी…

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बच्चे को क्या खिलाना चाहिए

जब बच्चा करीब चार से छह महीने का हो जाता है तब आप धीरे-धीरे उसे मां के दूध के अलावा खाने की और चीजें भी देना शुरू कर सकते हैं। जब हम बच्चे को मां के दूध के अलावा खाने की दूसरी चीजें भी देना शुरू कर देते हैं, हम कहते हैं कि हम ऊपरी खाना दे रहे हैं। मां का दूध पौष्टिक होता है। मां के दूध में खाने के वे पौष्टिक तत्व काफी मात्रा में होते हैं जो बच्चे को चार से छह महीने की उम्र तक चाहिए…

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अच्छी आदतों से रह सकते हैं फिट

सेहत और खान-पान की आदतों का चोली दामन का साथ है। अगर हम सही और पौष्टिक खाते हैं तो फिट रहते हैं। जहां हमने सही और पौष्टिक आहार पर अपनी पकड़ ढीली की, वहीं नतीजा सामने आ जाता है। कई लोग वैसे संतुलित चलते हैं पर अपनी पसन्द के खाद्य पदार्थों को देखते ही अपना संतुलन खो बैठते हैं। माह में एक दो बार तो ठीक है पर अक्सर ऐसा होता रहे तो नतीजा खराब होगा ही। अगर खाने में कोई गलत आदतें डल गयी हैं तो समय रहते बदलें…

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(व्यंग्य) वक्त तो बाबाओं का भी आता है प्राइम टाइम पर

वक्त तो बाबाओं का भी आता है प्राइम टाइम पर। यूं उनके फलने-फूलने के तो सब दिन होते हैं। कहा भी है कि हर दिन दिवाली संत की। लेकिन दिवाली पर भी सबका पत्ता कहां लगता है, ज्यादातर का तो दीवाला ही निकलता है। पर संत को इम्युनिटी हासिल होती है। इसीलिए तो वे दिन-दूनी और रात चौगुनी तरक्की करते हैं। उनकी रफ्तार से बस मुल्क ही तरक्की नहीं कर पाता। वरना तो हमारी विकास दर डबल डिजीट में तो क्या ट्रिपल डिजीट तक भी पहुंच सकती थी। पर मुल्क…

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