श्रीराम मंदिर के लिए हो सकता है जन- आंदोलन

मृत्युंजय दीक्षित 29 अक्टूबर 2018 के दिन जब सर्वोच्च न्यायालय में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अयोध्या विवाद की सुनवाई शुरू की। सुनवाई मात्र तीन मिनट में ही तीन माह के लिये टल गयी। जजों ने उसमें यह टिप्पणी भी कर दी कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का मामला हमारी पहली प्राथमिकता में शामिल नहीं है। इस समाचार से पूरे देश- समाज में गहरी निराशा का भाव जागना स्वाभाविक ही था। जब पूरे देशभर में यह मांग पूरी तरह से जोर पकड़ चुकी है कि अयोण्या विवद…

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नागरिकता संशोधन विधेयक बना असमिया अस्मिता का सवाल

: अरविंद कुमार राय असमिया अस्मिता को लेकर होने वाला संघर्ष अब हिंसक हो गया है। इसके चलते हाल ही में पांच बांग्लाभाषी ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब इसे लेकर राज्य में राजनीति शुरू हो गई है। सच यह है कि असम में भाषा और अस्मिता के नाम पर कई बड़े आंदोलन हो चुके हैं। इन आंदोलनों में समें हजारों लोगों की जान जा चुकीं हैं। अस्मिता के नाम पर उग्रवाद का जन्म पूर्वोत्तर की धरती पर हुआ, जो बदस्तूर आज भी खून बहा रहा है।…

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चिंता महिलाओं के हक की या धर्मांतरण की?

– सियाराम पांडेय ‘शांत’ सबरीमाला मंदिर को लेकर आस्था और न्याय की जंग जारी है। अब तो इसे राजनीतिक रूप भी दिया जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा के विधायकों का केरल के मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से उठकर चले जाना इसी ओर इशारा करता है। मुख्यमंत्री पी.विजयन इस पूरे मामले को भाजपा और संघ की साजिश करार दे रहे हैं। कांग्रेस के खिलाफ उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। इस तथ्य के मूल में जाने की जरूरत है। दरअसल इसे दक्षिण के अयोध्या के तौर पर देखा जा…

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राममंदिर के निर्माण में बाधा बनी कांग्रेस

कृष्णप्रभाकर उपाध्याय क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि जिस कांग्रेस के शासनकाल में 1949 में रामजन्मभूमि परिसर में रामलला की विधिवत पूजा-अर्चना आरम्भ हुई, जिस कांग्रेस के शासनकाल में 1 फरवरी 1986 को रामजन्मभूमि का ताला खुला, जिस कांग्रेस के शासनकाल में 9 नवम्बर 1989 को शिलान्यास की अनुमति दी गयी तथा जिस कांग्रेस के शासनकाल में 6 दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा टूटा- वही कांग्रेस आज मंदिर निर्माण के मार्ग में खलनायक की भूमिका में नजर आ रही है! प्रश्न है कि ऐसा क्यों कर रही है कांग्रेस? प्रश्न का…

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अयोध्या में इस सरगर्मी के मायने क्या?

सियाराम पांडेय ‘शांत’ अयोध्या में देव दीपावली के पहले से ही आयोजनों का जो माहौल बना था, वह बरकरार है। इस निरंतरता को 6 दिसंबर और उसके बाद तक बनाए रखने की प्रमुख हिंदू संगठनों की योजना है। साध्वी प्राची समेत कई हिंदू नेता बयान दे चुकके हैं कि 6 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहा था और 6 दिसंबर को ही प्रभु राम का मंदिर बनना शुरू हो जाएगा। क्या इसे महज उनका बड़बोलापन मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए?वैसे यह सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार पर दबाव बनाने…

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सत्य और शिव के बिन सौंदर्य बेमानी

हृदयनारायण दीक्षित बोलने से मन नहीं भरता। लगातार बोलना हमारा व्यावहारिक संवैधानिक दायित्व है। विधानसभा का सदस्य हूं और अध्यक्ष भी। जनप्रतिनिधि जनता की ओर से बोलते हैं। लोगों ने मुझे चुना है कि बोलो, सदन में बोलो। सदन की समितियों में बोलो। सभाओं में बोलो और गोष्ठियों में बोलो। बोलते बोलते थक जाना चाहिए लेकिन बोलना लत हो गया है। लोग मिले कि मैं शुरू हो गया। मैं एक यंत्र बन गया हूं। रिमोट आगंतुको के पास है, वे बोले कि मैं बोलने लगा। राजनैतिक संवर्ग बोलता रहता है।…

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जल परिवहन, एक भविष्यदर्शी योजना

सियाराम पांडेय शांत प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रथम उपस्थिति में काशीवासियों को यह कहकर चौंकाया था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। इस बयान के बाद मोदी पर उस समय और उसके बाद भी तमाम राजनीतिक आक्षेप हुए लेकिन मोदी उससे जरा भी विचलित नही हुए। वे काशी आते रहे और उसे विकास की सौगात देते रहे। काशी ने अगर देश का प्रधानमंत्री चुना तो यह कहने में किसी को शायद ही गुरेज हो कि मोदी ने काशी को बनाया। उसके विकास के सपने…

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राजनीति के केंद्र में होगी मोदी की काशी

: प्रभुनाथ शुक्ल कुछ माह बाद 2019 में लोकसभा के आम चुनाव होने हैं। लिहाजा देश का मूड चुनावी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हो रहे आम चुनाव ने गुलाबी ठंड में भी तपिश बढ़ा दी है। कर्नाटक में हुए उपचुनाव और उसके बाद आए परिणाम ने इस सरगर्मी को और बढ़ाया है। गैर भाजपाई दल राज्य विधानसभा चुनाओं को जहां भाजपा और मोदी के लिए लिटमस टेस्ट मान रहे हैं, वहीं कर्नाटक की जीत को महागठबंधन के लिए सरकारात्मक बताया जा रहा है। लेकिन 2019 का सेमी…

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क्रिकेट के दूसरे ‘भगवान’ बनेंगे कोहली?

योगेश कुमार गोयल भारतीय क्रिकेट जगत में ‘भगवान’ माने जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अपने कैरियर में पूरे फॉर्म में थे। उस समय अक्सर सवाल उठता था कि सचिन जिस प्रकार नए-नए कीर्तिमान बनाते हुए पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर रहे हैं, क्या कोई अन्य खिलाड़ी उनकी जगह ले पाएगा? दरअसल सचिन ने अपने दो दशक लंबे टेस्ट और वनडे कैरियर में इतना बेहतरीन प्रदर्शन किया था कि देश में खेलप्रेमियों ने उन्हें ‘क्रिकेट के भगवान’ का दर्जा दे दिया। लंबे अरसे बाद ही सही, अब भारतीय टीम के कप्तान…

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वचन और संकल्प बनाम वादे

सियाराम पांडेय ‘शांत’ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को लुभाने में जुटी है। एक दूसरे को नीचा दिखाने, नाकाम घोषित करने की गलाकाट स्पर्धा चल रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अपना वचनपत्र जारी किया है जबकि छत्तीसगढ़ में उसने घोषणापत्र जारी कर रखा है। वचन का महत्व होता है लेकिन देखना होगा कि वचन देने वाले की अहमियत क्या है? जब उसे जनता ने मौका दिया था, तब भी उसने जनता से कुछ वादे किए थे, उन्हें कितना पूरा किया?…

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