कश्मीर में बढ़ी हिंसा और कश्मीरियों की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय

-अनवार अहमद नूर- भारत का अभिन्न अंग कश्मीर पिछले काफी समय से आतंक और हिंसा का केन्द्र बना रहा है राजनीतिक अस्थिरता के साथ साथ वहां से लगातार मुठभेड़ों और खून खराबे की खबरें आती रहीं हैं लेकिन पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों के साथ मारपीट और धमकी की खबरें कुछ अधिक बढ़ गयी हैं जिससे चिन्तित होकर भारतीय ग्रहमंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर कश्मीरी छात्रों और लोगों की सुरक्षा की व्यवस्था को कहा है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 44 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने के…

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आतंकियों से कम नहीं हैं पत्थरबाज

-योगेश कुमार गोयल- 14 फरवरी को घाटी में हुए सबसे बड़े फिदायीन हमले के बाद यह तथ्य सामने आया कि 20 वर्षीय आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार मार्च 2018 में जैश-ए-मोहम्म्द में शामिल होने से पहले घाटी में एक पत्थरबाज के रूप में सक्रिय था। यह बात भी आईने की तरह साफ हो गई है कि सुरक्षाबलों के लिए घाटी में मुसीबत का सबब बनते रहे ऐसे पत्थरबाज आने वाले समय में देश की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं। बाद में 18 फरवरी को जब इस…

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सुरक्षा बलों की शहादत व भारतीय राजनीति

-तनवीर जाफरी- जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले दिनों एक बार फिर भारतीय सुरक्षा बलों को भारी कीमत चुकानी पड़ी। केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल के 40 जवान गत् 14 फरवरी को सायंकाल पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए एक बड़े व नियोजित आत्मघाती हमले में शहीद हो गए। 18 सितंबर 2016 को इसी आतंकी संगठन जैश द्वारा उरी में किए गए आतंकी हमले के बाद पुलवामा के हमले को अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। गौरतलब है कि उरी में सुरक्षा बलों को निशाना…

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भितरघातियों को समाप्त किये बिना आतंकवाद का सफाया असम्भव

-डा. रवीन्द्र अरजरिया- आतंकवाद के दावानल ने एक बार फिर अमन की छाती में खंजर भौंका। गुनाहगार ने खुद इकबालिया बयान दिया। दहशतगर्दी को पालने वाला पाकिस्तान और उसका सरपरस्त चीन पर्दे के पीछे से काली फसल उगाने में लगा है। देश के अन्दर बैठे कई सियासतदार भी सीमापार की जुबान बोल रहे हैं। ऐसे सियासतदारों और अनेक जयचन्दों की हिफाजत में हमारी सुरक्षा एजेंसियों को लगाया गया है। मानवता की दुहाई पर दानवता के पक्षधरों को पाला-पोशा जा रहा है। कई राजनैतिक दलों के शब्द उनकी नकारात्मक सोच की…

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फेसबुक के नए वर्जन से सावधान

योगेश कुमार सोनी आज के युग मे जिंदगी का पर्यायवाची बन चुका फेसबुक अश्लीलता का भी दूसरा रूप बन गया है। थोड़े थोडे समय पर फेसबुक में बदलाव होता रहता है व नई चीजें जुड़ती रहती हैं। कुछ महीनों पहले से फेसबुक के ऊपर वाले हिस्से पर विंडो बनी होती है, जिस पर वीडियों का भी नया ऑप्शन जुड़ा है। इसमें फेसबुक खुद से वीडियो अपलोड करता है। उसका नोटिफिकेशन भी आता है। इसमें कपिल शर्मा के शो की छोटी क्लिपिंग व अन्य कई तरह की क्लिपिंग के साथ अश्लील…

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बात का बतंगड़ बना रहे अखिलेश

सियाराम पांडेय ‘शांत’ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर विपक्ष का दबाव निरंतर बढ़ रहा है। प्रयागराज जाने से सपा प्रमुख अखिलेश यादव को रोकने से सपा कार्यकर्ता ही नहीं, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि भी नाराज हैं। सपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी तो प्रदेश भर में हंगामा और प्रदर्शन कर ही रहे हैं। इस आंदोलन में विधायक और विधान परिषद सदस्य भी शामिल हो गए हैं। विधान सभा और विधान परिषद में हंगामा इसका प्रमाण है। अखिलेश यादव को प्रयागराज न जाने देने का असर संसद पर…

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नवजात जीवन पर लगता ग्रहण

मोनिका आर्या पिछले चार साल में स्पेशल एडॉप्शन एजेंसीज यानी शिशु गृहों में रह रहे करीब 1300 बच्चे (1265) मौत का शिकार हो गए। इनमें अधिकांश वे शिशु शामिल थे, जो एबेंडन यानी परित्यक्त अवस्था में मिले थे। ये किसी अखबार या संस्था का आंकड़ा नहीं है, बल्कि ये सरकार का जवाब है, जो कांग्रेस नेता शशि थरूर के सवाल पर संसद में दिया गया है। सरकार की ओर से महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री वीरेंद्र कुमार ने थरूर के लिखित सवाल के जवाब में यह आंकड़ा सदन के…

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गठबंधन की ढीली होती गांठ

प्रमोद शुक्ल ‘चने की झाड़’ पर चढ़ाकर पीछे से सीढ़ी खींच लेने वाली कहावत को पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने फिर एक बार चरितार्थ करके दिखा दिया है। संविधान और कानून को नजरअंदाज करते हुए मनमानी पर आमादा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को खुलेआम संरक्षण देते हुए धरने पर बैठी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पहले तो कांग्रेस ने समर्थन देकर मनोबल बढ़ाया, फिर सुप्रीमकोर्ट का कड़ा रुख देखकर धीरे से पीछे हट गयी। बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ 2019 के चुनाव में कोई भी तालमेल न करने की साफ…

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अब प्रियंका ही कांग्रेस का भविष्य तय करेंगी

-सीमा पासी- यह बात तो सही नहीं है कि प्रियंका गांधी ने अभी सक्रिय राजनीति में आना तय किया है वो बहुत पहले से राजनीति में ही है लेकिन वो केवल चुनावों के समय ही अपनी माता और भाई के लिये चुनाव प्रचार करती थी। पहले उन्होंने कांग्रेस में औपचारिक रूप से कोई पद ग्रहण नहीं किया था लेकिन पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भागीदारी रही है। अभी तक राहुल गांधी भी बेमन से राजनीति करते हुए प्रतीत होते थे लेकिन अब वो राजनीति को गम्भीरता से ले रहे…

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मतदातों से एक निवेदन-अगली सरकार मज़बूत सरकार

-इंदु बरोरा- सबसे पहले यह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि यह अपील मज़बूत सरकार चुनने के लिये है, मोदी सरकार चुनने के लिये नहीं। अगर आपको लगता है कि कांग्रेस एक मज़बूत सरकार दे सकती है तो उसे भरपूर बहुमत देकर जितायें। और अगर आप समझते हैं कि बीएसपी, या टीएम्सी या एएपी या कोई अन्य दल या दलों का समूह मज़बूत सरकार दे सकता है तो उस दल/समूह को अपना भरपूर समर्थन दें, कोई कमी न छोड़े। हर  मतदाता  को यह बात समझनी होगी कि देश को तोड़ने वाली…

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