प्रधानमंत्री मोदी को ‘चोर’ कहकर राहुल ने अपने मुंह कालिख पोती: भाजपा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘चोर’ और ‘भ्रष्ट’ कहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और कहा कि आजाद भारत के इतिहास में किसी राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया है। भाजपा ने राफेल युद्धक विमानों की खरीद के सौदे के संबंध में राहुल के आरोपों को भी पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि फ्रांस की सरकार और विमान कंपनी दसाल्ट ने इस संबंध में वक्तव्य जारी कर किसी तरह की अनियमितता का खंडन किया है। फ्रांस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दसाल्ट और भारतीय कंपनी रिलायंस डिफेंस के बीच समझौते में भारत या फ्रांस सरकार की कोई भूमिका नहीं है।  भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि राफेल युद्धक विमान की हथियार प्रणाली को सार्वजनिक करने की मांग दुश्मनों को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। राहुल गांधी हथियारों से लैस राफेल विमानों की कीमत जाहिर करने की मांग करके पाकिस्तान और चीन के हाथों में खेल रहे हैं। यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। भाजपा नेता और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को राफेल युद्धक विमान प्रकरण में एक प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल ने सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए देश के ईमानदार प्रधानमंत्री पर गैरजिम्मेदाराना आरोप लगाकर स्वयं अपने मुंह पर कालिख पोत ली है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार की जननी है। राहुल अपनी मां के साथ नेशनल हेराल्ड प्रकरण में जमीन और शेयरों की लूट में शामिल हैं। मां-बेटे दोनों चार्जशीटेड हैं और जमानत पर हैं। साथ ही, राहुल के बहनोई राबर्ट वाड्रा भूमि घोटाले में शामिल हैं जिस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष का मुंह बंद है। रविशंकर प्रसाद ने राफेल सौदे के बारे में तथ्यों का सप्रमाण ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि फ्रांसीसी कंपनी दसाल्ट और रिलायंस डिफेंस के बीच 13 फरवरी, 2012 को समझौता हो गया था। उस समय मनमोहन सिंह सरकार थी जबकि प्रधानमंत्री मोदी सरकार की सरकार कई वर्ष बाद आई। इस तथ्य से राहुल का यह आरोप झूठा साबित होता है कि अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से कोई मदद दी गई। भाजपा नेता ने प्रेस कांफ्रेंस में इस विवाद के बारे में फ्रांस सरकार और दसाल्ट कंपनी द्वारा जारी किए गए वक्तव्यों का हवाला दिया। फ्रांस सरकार ने दसाल्ट और रिलायंस डिफेंस के बीच समझौते में सरकार की भूमिका को नकारा है जबकि फ्रांसीसी कंपनी ने कहा है कि उसमें रिलायंस डिफेंस के अलावा भी छह भारतीय कंपनियों से अनुबंध किया है। कंपनी ने कहा है कि वह भारत सरकार के मेक इन इंडिया अभियान के तहत युद्धक विमान भारत में ही बनाएगी तथा इस काम में करीब 100 भारतीय कंपनियों को साझीदार बनाने के लिए समझौता वार्ता चल रही है। भाजपा नेता ने कहा कि राफेल का स्वदेश में निर्माण होने से देश भर में फैली सहयोगी भारतीय कंपनियों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से पूछा कि वे भारतीय युवाओं को रोजगार के अवसरों से महरूम करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? कानून मंत्री ने कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हथियार व रक्षा उपकरण से रहित राफेल विमान की कीमत मोदी सरकार ने नौ प्रतिशत कम कीमत पर हासिल करने में सफलता पाई है। हथियारों से संपन्न विमान की कीमत में मनमोहन सरकार की तुलना में 20 प्रतिशत कम कीमत पर राफेल विमान भारत को भेज सकेंगे। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मनमोहन सरकार ने भारतीय वायुसेना की आवश्यकता की अनदेखी करके करीब एक दशक तक इस सौदे को लटकाए रखा। जनवरी 2012 में युद्धक विमानों की खरीद के लिए दसाल्ट का चुनाव किया गया लेकिन छह महीने बाद जुलाई महीने में इसकी समीक्षा करने का फैसला किया गया। भाजपा नेता का आरोप था कि कांग्रेस नेताओं को घूस नहीं मिला, इसलिए छह महीने के अंदर ही पुराने फैसले को बदल दिया गया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सौदे में गोपनीयता उपबंध मनमोहन सरकार के रक्षामंत्री ए.के.एंटनी ने स्वीकार किया था जबकि दसाल्ट व रिलायंस डिफेंस के बीच समझौता भी पुरानी सरकार के कार्यकाल में हुआ था। ऐसी स्थिति में राहुल मोदी सरकार पर आरोप लगाकर अपनी अज्ञानता जाहिर कर रहे हैं।

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