आदिवासी सभ्यता-संस्कृति को मिटाना चाहती है सरकार : बृंदा करात

गुमला। पूर्व सांसद व सीपीआई (एम) की पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने कहा कि राज्य सरकार लोगों को बेघर कर आदिवासी सभ्यता-संस्कृति को मिटाना चाहती है। जल, जंगल और जमीन यहां के आदिवासियों की है। आदिवासी बेघर न हो, इसके लिए सरकार कार्य करे। बृंदा करात ने मंगलवार को स्थानीय परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रही थी। बृंदा करात एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चैनपुर जाने के पूर्व गुमला परिसदन में कुछ देर के लिए रूकी थीं । उन्होंने कहा कि एलिफैंट कॉरीडोर के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासियों का आंदोलन चल रहा है और विगत माह इसे लेकर एक सम्मेलन का आयोजन भी किया गया था। वहां से लौटने के बाद केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन व राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया। इन्होंने आश्वासन भी दिया, मगर स्थिति आज भी यथावत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की जमीन अधिग्रहण कर उन्हें बेघर करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए हमारा आंदोलन जारी है। करात ने कहा कि 30 अप्रैल को रांची के मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय के समक्ष धरना दिया जाएगा। सरकार की जो व्यवस्था है वह पूरी तरह चरमरा चुकी है। आधार के कारण खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभ से लोग वंचित हो रहे हैं। सरकार के छात्रावासों की स्थिति बहुत दयनीय है। उन्होंने कहा कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज व बाक्साईट उत्खनन के लिए भी भूमि का अधिग्रहण कर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने पर सरकार अमादा है। यहां के स्थानीय आदिवासियों को बेघर कर उनकी सभ्यता-संस्कृति को समाप्त करना सरकार का मूल उद्देश्य है। जल, जंगल व जमीन यहां के आदिवासियों की है।

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